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दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का आगाज :वैश्विक चुनौतियों के बीच महाशक्तियों का मिलन

नई दिल्ली। आज 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का औपचारिक आगाज हो गया है। भारत मंडपम में 12 और 13 सितंबर को होने वाली इस बैठक में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों के नेता शामिल हो रहे हैं। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन दिल्ली पहुंच चुके हैं, जबकि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग आज भारत पहुंचेंगे। इस समिट पर दुनिया भर की नजरें इसलिए भी टिकी हैं क्योंकि यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, वैश्विक व्यापार तनाव और बदलती विश्व व्यवस्था के बीच ब्रिक्स की भूमिका पर अहम चर्चा होनी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शी जिनपिंग के साथ प्रस्तावित मुलाकात भी इस सम्मेलन के सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रमों में से एक होगी।
शिखर सम्मेलन से पहले भारत मंडपम में सुरक्षा जांच चल रही है, जहां ब्रिक्स सदस्य और भागीदार देशों के नेताओं के साथ-साथ आमंत्रित प्रतिनिधि भी एक साथ आ रहे हैं।

इस साल का विषय है: लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण ब्रिक्स के संस्थापक सदस्य भारत ने इससे पहले 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता की है। ब्रिक्स देशों और वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की बढ़ती भूमिका पर चीन के वरिष्ठ पत्रकार ने कहा कि उन्होंने लगभग 20 साल पहले भारत में काम किया था और अब जब वह दोबारा यहां आए हैं, तो उन्होंने पाया कि भारत ने बहुत तेजी से विकास किया है, जिसमें गगनचुंबी इमारतें, मॉल और औद्योगिक पार्क शामिल हैं। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग अपने साथ लगभग 400 लोगों का प्रतिनिधिमंडल लेकर भारत पहुंच रहे हैं, जिसमें कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चाइना (सीपीसी) केंद्रीय समिति के राजनीतिक ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और अन्य उच्चाधिकारी शामिल हैं, जो इस सम्मेलन के महत्व को दर्शाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस भी इस सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंच चुके हैं।

ब्रिक्स समिट के मुख्य मुद्दों में स्थानीय मुद्राओं में व्यापार को बढ़ावा देना शामिल है, ताकि आपसी व्यापार के लिए डॉलर के विकल्प के रूप में राष्ट्रीय मुद्राओं (जैसे रुपया, युआन, रूबल) का इस्तेमाल किया जा सके। विकासशील और अल्पविकसित देशों के आर्थिक व कूटनीतिक हितों को वैश्विक मंचों पर प्रमुखता से उठाना, यानी ग्लोबल साउथ की आवाज बनना भी एक महत्वपूर्ण एजेंडा है। इसके अतिरिक्त, रूस-यूक्रेन और पश्चिम एशिया संकट जैसे जारी युद्धों और फारस की खाड़ी के तनावों के ग्लोबल सप्लाई पर पड़ रहे असर पर विस्तृत चर्चा होगी। ब्रिक्स बैंक के माध्यम से सदस्य देशों में बुनियादी ढांचा और सतत विकास परियोजनाओं के लिए वित्तीय मदद को बढ़ाना भी सम्मेलन के प्रमुख बिंदुओं में से एक है। सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कई वैश्विक नेताओं, विशेषकर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय वार्ताएं भी करेंगे, जो वैश्विक कूटनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

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