नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने शुक्रवार को नई दिल्ली के भारत मंडपम में द्विपक्षीय बैठक की। यह बैठक ब्रिक्स 2026 से एक दिन पहले हुई। बैठक में भारत और रूस के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने पर खास जोर रहा। दोनों देशों के बीच 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य सबसे अहम मुद्दों में रहा। इसके अलावा औद्योगिक सहयोग, परमाणु ऊर्जा, कुशल भारतीय कामगार, क्रिटिकल मिनरल्स और खाद की सप्लाई जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भारत और रूस के बीच इस समय करीब 60 अरब डॉलर का सालाना कारोबार है। इसमें रूस से भारत को होने वाला कच्चे तेल का आयात बड़ी भूमिका निभाता है। अब दोनों देश अगले चार साल में व्यापार को 40 अरब डॉलर और बढ़ाकर 2030 तक 100 अरब डॉलर तक ले जाना चाहते हैं। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने 10 सितंबर को कहा था कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए दोनों देशों के कारोबार को लगातार दोहरे अंकों की सालाना वृद्धि की जरूरत होगी। इसके लिए भारत और रूस नए कारोबारी क्षेत्रों की पहचान करने, बाजार तक पहुंच बढ़ाने और भारतीय उत्पादों की रूस में बिक्री बढ़ाने पर काम कर सकते हैं।
रेलवे से स्टील तक बढ़ेगा व्यापार – भारत और रूस के बीच औद्योगिक सहयोग बढ़ाना भी बैठक का अहम मुद्दा रहा। नई दिल्ली में शुरू हुए ट्रेड फेयर को दोनों देशों की कंपनियों के बीच नई साझेदारी के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के तौर पर देखा जा रहा है। रेलवे, टनल निर्माण और स्टील सेक्टर की पूरी वैल्यू चेन में सहयोग बढ़ाने पर भी जोर है। इसके साथ ही दोनों देशों की कंपनियों के बीच सीधे बिजनेस अवसर बढ़ाने और रूस के बाजार में भारतीय सामान की पहुंच आसान बनाने पर चर्चा हुई।
न्यूक्लियर एनर्जी में बढ़ेगा सहयोग – दोनों देश सिविल न्यूक्लियर एनर्जी के क्षेत्र में भी सहयोग मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। इसमें परमाणु ईंधन से लेकर न्यूक्लियर प्रोजेक्ट्स को लंबे समय तक तकनीकी और दूसरी तरह का सपोर्ट देने तक सहयोग शामिल हो सकता है।



