नई दिल्ली। केंद्र सरकार में लंबे समय से कैबिनेट फेरबदल की अटकलें चल रही हैं, और अब राज्यसभा चुनाव की तैयारियों के अंतिम दौर में इन अटकलों को और बल मिला है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) द्वारा राज्यसभा के लिए अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करने के बाद, यह संभावना जताई जा रही है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाले केंद्रीय मंत्री परिषद में जल्द ही नए चेहरों की एंट्री हो सकती है, जबकि कुछ मौजूदा मंत्रियों को पद छोड़ना पड़ सकता है।
ताजा चर्चाओं का केंद्र केंद्रीय मंत्री बीएल वर्मा और हरदीप सिंह पुरी हैं, जिन्हें भाजपा ने राज्यसभा के लिए दोबारा टिकट नहीं दिया है। इन दोनों मंत्रियों का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है।
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 75(5) के अनुसार, यदि कोई मंत्री लगातार छह महीने तक संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं रहता है, तो उसे अपना पद छोड़ना पड़ता है। ऐसे में, इन दोनों मंत्रियों के पद पर बने रहने की संभावनाएं अब कम दिख रही हैं। पुरी और वर्मा के अलावा, दो अन्य मंत्रियों रवनीत सिंह बिट्टू और जॉर्ज कुरियन की भी राज्यसभा में वापसी नहीं हुई है। इस तरह, कुल चार मंत्रियों के केंद्रीय कैबिनेट से बाहर होने की संभावना बन रही है, जिससे नए मंत्रियों की एंट्री का रास्ता साफ हो सकता है।रेल राज्य मंत्री रहे रवनीत सिंह बिट्टू ने जुलाई में पद से इस्तीफा दे दिया था, जब उनका राज्यसभा कार्यकाल जून में समाप्त हो गया था। पार्टी ने उन्हें उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया।अटकलें हैं कि बिट्टू अब पंजाब विधानसभा चुनाव (2027) में भाजपा के लिए एक बड़ी भूमिका निभा सकते हैं।
इसी तरह, अल्पसंख्यक मामलों के राज्य मंत्री जॉर्ज कुरियन ने भी जून में अपना राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने के बाद केंद्रीय मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। केरल से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं में शामिल कुरियन सरकार में अकेले ईसाई मंत्री थे और वे 1980 से भाजपा व राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े रहे हैं। उनके लिए भी संगठन में बड़ी जिम्मेदारी की बातें कही जा रही हैं। इस बीच, भाजपा ने राज्यसभा के लिए 8 और नए नामों का ऐलान किया है, जिनमें पशुपालन मंत्री धर्मपाल सिंह, इलाहाबाद हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा, भाजपा ओबीसी मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष प्रकाश पाल, पूर्व सांसद विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्णा पांडेय, पूर्व सांसद प्रियंका सिंह रावत, प्रदेश महामंत्री रामप्रताप सिंह चौहान और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार शामिल हैं।
पार्टी ने इस सूची में ओबीसी वर्ग से तीन, दलित वर्ग से दो, ब्राह्मण दो और एक ठाकुर चेहरे पर दांव लगाया है। कैबिनेट में बदलाव की यह प्रक्रिया कोई नई नहीं है। इससे पहले, जुलाई में शिक्षा मंत्री के पद से धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा देने और उनकी जगह प्रल्हाद जोशी को मंत्री बनाए जाने का उल्लेख किया गया था। यह भी कहा जा रहा है कि सरकार के कई बड़े नाम अब संगठन में अहम जिम्मेदारी निभा सकते हैं, जैसा कि केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल को भी संगठन में जिम्मेदारी देने के साथ देखा गया है।



