देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस में जारी अंदरूनी कलह के बीच पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अचानक कांग्रेस पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया है। उन्होंने यह बड़ा फैसला शनिवार को लिया है। यह कदम ऐसे समय में आया है जब हाल ही में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उनके ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़ी मात्रा में नकदी और सोना बरामद किया था।रावत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक लंबी पोस्ट लिखकर अपने इस्तीफे की वजह बताई। उन्होंने कहा कि टीवी पर उनके सहयोगी के घर से भारी मात्रा में कैश और जूलरी मिलने की खबरें चल रही हैं, जिसकी सच्चाई जल्द सामने आ जाएगी। रावत ने स्वीकार किया कि चंदन सिंह जीना उनके ओएसडी रहे हैं, और यदि ग्राम सेवक भर्ती परीक्षा या ओएमआर शीट से छेड़छाड़ में उनके खिलाफ कोई गड़बड़ी या सबूत पाए जाते हैं, तो यह उनके लिए बहुत बड़ी शर्मिंदगी होगी। हालांकि, उन्होंने जीना पर लगे आरोपों पर अविश्वास भी जताया।
अपने इस्तीफे का कारण बताते हुए रावत ने कहा, उत्तराखंड के चुनाव में भारी स्टेक्स हैं। मुझसे जब भी कोई व्यक्ति पूछता था कि चुनाव कब हो रहे हैं? तो मैं हंसी में उनसे कहता था कि भई चुनाव तब होंगे, जब सीबीआई मेरे दरवाजे पर दस्तक देने आएगी। यदि अभी नहीं आई है तो इसका अर्थ है कि चुनाव अगले वर्ष मार्च-अप्रैल में ही होंगे। लेकिन इस बार मेरे घर पर नहीं, मेरे एक सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नरेटिव बनाने का प्रयास किया गया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस पार्टी और उसके कार्यकर्ता भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रहे हैं, और राहुल गांधी राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा प्रणाली में भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं। ऐसे में हरीश रावत के किसी भी कृत्य से यदि पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी आती है, तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे। इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सदस्यता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति के स्थायी आमंत्रित सदस्य पद से विनम्रतापूर्वक हटने का निर्णय लिया है, ताकि उनकी वजह से पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी न आए।
अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (यूकेएसएसएससी) के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसका गठन राज्य के नौजवानों के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उन्होंने अपने कार्यकाल में पब्लिक सर्विस कमीशन को समय पर परीक्षाएँ लेने के लिए बाध्य किया और 42,000 से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां हुईं। उन्होंने स्वीकार किया कि यदि नियुक्तियों में कोई एरर ऑफ जजमेंट हुआ है, तो वह उत्तराखंड के लोगों से क्षमा प्रार्थी हैं। उन्होंने यह भी बताया कि यूकेएसएसएससी के चेयरमैन की नियुक्ति पिछली सेवा रिकॉर्ड और तत्कालीन पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी की सलाह पर की गई थी, जिन्हें शिकायत मिलने के बाद उन्होंने ही हटाया था। रावत ने यह भी कहा कि कौन व्यक्ति कहां गलती कर दे, कोई नहीं जान सकता, ठीक वैसे ही जैसे किसी को नहीं पता होता कि आरएसएस का कोई पदाधिकारी भ्रष्ट निकल सकता है। चंदन सिंह जीना 2014 से 2017 तक हरीश रावत के मुख्यमंत्री रहते हुए उनके ओएसडी रहे थे। ईडी ने उनके आवास से 32 लाख रुपये नकद, 12 लग्जरी घड़ियां और 200 ग्राम सोना बरामद करने की जानकारी दी थी, ये बरामदगी उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की परीक्षा में गड़बड़ी की जांच के संबंध में हुई थी।



