चंडीगढ़ । पंजाब कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के नए प्रभारी सचिन पायलट ने नेताओं को एक मंच पर लाने की कोशिश तेज कर दी है। पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग गुटों के बीच समन्वय बनाने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी को एकजुट तरीके से आगे बढ़ाने की है।पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और वरिष्ठ नेता सुखजिंदर सिंह रंधावा के बीच अलग-अलग मुद्दों पर मतभेद सामने आते रहे हैं। टिकट वितरण का मुद्दा भी पार्टी के भीतर खींचतान का एक प्रमुख विषय रहा है।
अगस्त में ‘एक परिवार, एक टिकट’ के फॉर्मूले को लेकर नेताओं के बीच सार्वजनिक मतभेद सामने आए थे। कुछ नेताओं ने टिकट के लिए जीतने की क्षमता को आधार बनाने की बात कही थी।पायलट के पंजाब प्रभारी बनने के बाद पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं के बीच संवाद बढ़ा है। हाल के घटनाक्रम में चन्नी और वड़िंग ने मतभेदों को पीछे रखते हुए साझा मंच पर उपस्थिति दर्ज कराई। सुखजिंदर सिंह रंधावा के रुख में भी नरमी के संकेत मिले हैं।पायलट ने 15 सितंबर को पंजाब सरकार के खिलाफ कांग्रेस के प्रदर्शन का नेतृत्व भी किया। यह प्रदर्शन दलित मजदूर गुलजार सिंह की मौत सहित विभिन्न मुद्दों को लेकर किया गया था।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पानी की बौछारों का इस्तेमाल किया।आगामी चुनाव को लेकर पायलट पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि कांग्रेस पंजाब में किसी एक नेता को मुख्यमंत्री चेहरे के तौर पर पेश नहीं करेगी। पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और मुख्यमंत्री पद पर फैसला चुनाव के बाद किया जाएगा। इस बीच टिकट वितरण और उम्मीदवार चयन को लेकर अलग-अलग नेताओं की दावेदारी तथा स्थानीय समीकरण पायलट के लिए संगठनात्मक समन्वय की एक महत्वपूर्ण चुनौती बने हुए हैं।



