नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जहाँ उन्होंने चुनाव आयोग (ईसी) के उस फैसले को चुनौती दी है, जिस फैसले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का नाम और उसका प्रतिष्ठित फूल और घास (जोड़ा घास फूल) वाला पारंपरिक चुनाव चिह्न फ्रीज किया गया है। यह महत्वपूर्ण कदम 6 अक्टूबर को होने वाले नंदीग्राम उपचुनाव से ठीक पहले आया है, इस फैसले ने राज्य की राजनीतिक लड़ाई को और तेज किया है। यह विवाद टीएमसी के भीतर ममता और रिताब्रता बनर्जी के गुटों के बीच पारंपरिक फूल और घास चुनाव चिह्न पर दावेदारी को लेकर चल रहे आपसी झगड़े का नतीजा है। चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को इस चिह्न के इस्तेमाल से रोका है।
चुनाव आयोग के फैसले के अनुसार, ममता के गुट को अब ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस नाम और फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया है, जबकि विरोधी गुट को डेमोक्रेटिक तृणमूल कांग्रेस नाम के साथ लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया है।कोलकाता में पूर्व मुख्यमंत्री ममता ने चुनाव आयोग के फैसले को भारतीय लोकतांत्रिक इतिहास का काला दिन बताया। उन्होंने अपनी लड़ाई जारी रखने और लोकतांत्रिक व कानूनी तरीकों से टीएमसी की असली पहचान और फूल-घास वाला चुनाव चिह्न वापस पाने का संकल्प लिया।उन्होंने 29 वर्षों के अथक संघर्ष, त्याग और कई राजनीतिक लड़ाइयों के ज़रिए संगठन को बनाने की बात कह कर कहा, मैं ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस को नहीं छोड़ सकती। जब तक मैं जीवित हूँ, यह पार्टी मेरे साथ रहेगी और हमारे कार्यकर्ताओं के साथ रहेगी।
उन्होंने भावनात्मक जुड़ाव पर ज़ोर देकर कहा, एक माँ बच्चे को खोने का दर्द समझती है, और बच्चा माँ को खोने का दर्द समझता है। जिन्होंने संघर्ष करके संगठन नहीं बनाया, वे उस भावनात्मक जुड़ाव को नहीं समझ सकते। उन्होंने दावा किया कि लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक और पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने उनके गुट को समर्थन दिया है। दूसरी ओर, बागी गुट ने चुनाव आयोग के अंतरिम फैसले का स्वागत किया है। बागी गुट के विधायक अखरुज़्ज़मान अंसारी ने कहा, हम ईसी के आदेश को मानते हैं। ज़ाहिर है, हम घास पर दो फूल वाला चुनाव चिह्न चाहते थे। लेकिन चुनाव आयोग ने अभी के लिए एक अंतरिम आदेश दिया है। हमें भरोसा है कि जब आयोग अपना अंतिम फ़ैसला सुनाएगा, तब हमें पार्टी का आधिकारिक और असली नाम और चुनाव चिह्न मिल जाएगा। यह घटनाक्रम नंदीग्राम उपचुनाव से पहले आया है, जहाँ दोनों गुट अपनी राजनीतिक पहचान और भविष्य की लड़ाई लड़ रहे हैं।



