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गुरमीत सिंह खुड्डियां ने गुरदासपुर के खेतों में पराली की गांठें बनाकर पंजाब के किसानों से पराली न जलाने की अपील की

चंडीगढ़/गुरदासपुर-पराली जलाने के खिलाफ लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाते हुए पंजाब के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने आज गुरदासपुर जिले के बटाला में स्थित गांव पुरियां खुर्द में एक किसान के खेत में बेलर ट्रैक्टर से धान की पराली की गांठें (बेल्ज) बनाईं। इसके साथ उन्होंने यह स्पष्ट संदेश दिया कि ‘पराली एक साधन है, कचरा नहीं।’इस अनोखी पहल के साथ राज्य में धान की कटाई और पराली प्रबंधन की औपचारिक शुरुआत हो गई है। कृषि मंत्री ने यह संदेश दिया कि धान की पराली को जलाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से संभाला जा सकता है और इसे एक मूल्यवान साधन के रूप में इस्तेमाल करना समय की जोरदार मांग है।

मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व वाली पंजाब सरकार द्वारा मशीनरी के माध्यम से पराली प्रबंधन को दिए जा रहे बढ़ावे का जिक्र करते हुए स. गुरमीत सिंह खुड्डियां ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन (सी.आर.एम.) मशीनों के लिए किसानों को 50 प्रतिशत और कस्टम हायरिंग सेंटरों, एफ.पी.ओज़, सहकारी सभाओं और ग्राम पंचायतों को 80 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है।उन्होंने आगे कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए 576 करोड़ रुपये की कार्य योजना के तहत चलाई गई इस पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2022 में पराली जलाने के 49,922 मामले सामने आए थे जबकि 2025 में यह घटकर 5,114 रह गए। इससे साफ जाहिर है कि इनमें 90 प्रतिशत की कमी आई है।

इससे न केवल पर्यावरण स्वच्छ हुआ है बल्कि पंजाब को फसल अवशेष प्रबंधन रणनीति के लिए राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता भी मिली है।किसानों से धान की पराली को आग न लगाने की अपील करते हुए स. खुड्डियां ने कहा कि वे मिट्टी की सेहत और पर्यावरण की रक्षा के लिए सी.आर.एम. मशीनों का इस्तेमाल करके अवशेषों का वैज्ञानिक ढंग से निपटान करें।उन्होंने कहा, ”धान की पराली कचरा नहीं, बल्कि एक साधन है। हमें इसे जलाना बंद करना चाहिए।” उन्होंने कहा, ”सी.आर.एम. मशीनों का सुचारू उपयोग किसानों को पराली की उचित संभाल करने और आमदनी बढ़ाने में मदद करेगा।”

उन्होंने कहा कि पराली जलाने से मिट्टी की उपजाऊ शक्ति को नुकसान पहुंचता है, हवा प्रदूषित होती है और स्वास्थ्य के लिए, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए गंभीर खतरे पैदा होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार किसानों को मशीनरी, जागरूकता और तकनीकी मार्गदर्शन से सहायता करने के लिए प्रतिबद्ध है।कृषि मंत्री ने पंजाब को पराली जलाने से मुक्त राज्य बनाने के लिए किसानों, अधिकारियों और गांवों के भागीदारों को सामूहिक प्रयासों का न्योता दिया। उन्होंने किसानों से प्रशासन के साथ सहयोग करने और पराली जलाने के खिलाफ मुहिम में शामिल होने की अपील की। उन्होंने जोर दिया कि स्वच्छ पर्यावरण और टिकाऊ खेती एक साझा जिम्मेदारी है।

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