लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव के लिए समाजवादी पार्टी (सपा) और कांग्रेस के बीच सीट बंटवारे का फॉर्मूला लगभग अंतिम रूप ले चुका है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच प्रारंभिक दौर की बातचीत हो चुकी है, और जल्द ही सीटों की संख्या का औपचारिक ऐलान होने की संभावना है। इस समझौते के तहत, कांग्रेस के कुछ दावेदार सपा के चुनाव चिन्ह साइकिल पर चुनाव लड़ते हुए दिख सकते हैं। यह कदम विशेष रूप से कांग्रेस की पुरानी और परंपरागत सीटों पर अपनाया जा सकता है, जिससे गठबंधन की मजबूती बढ़ाई जा सके।
सूत्रों के अनुसार, इस गठबंधन में समाजवादी पार्टी बड़े भाई और कांग्रेस छोटे भाई की भूमिका में रहेगी। सीटों का बंटवारा इस सिद्धांत पर आधारित होगा कि जिस क्षेत्र में जो दल अधिक मजबूत होगा, उसकी दावेदारी को प्राथमिकता दी जाएगी। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि उनकी पार्टी यूपी में पुराने गठबंधन के साथ ही चुनाव लड़ेगी। इस रणनीति का मुख्य आधार 2024 के लोकसभा चुनाव में मिली अभूतपूर्व सफलता है। उस चुनाव में सपा और कांग्रेस ने मिलकर प्रदेश की 80 में से 43 लोकसभा सीटें जीतकर भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन को पीछे छोड़ दिया था। सपा को 37 और कांग्रेस को 6 सीटों पर जीत मिली थी, जो दोनों दलों के लिए एक बड़ी वापसी थी।
हालांकि, पिछली बार 2017 के विधानसभा चुनाव में सपा और कांग्रेस के गठबंधन को निराशा हाथ लगी थी। तब सपा 298 और कांग्रेस 105 सीटों पर लड़ी थी, लेकिन दोनों को मिलाकर केवल 54 सीटें ही मिल पाई थीं। 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अकेले मैदान में उतरी और केवल दो सीटें जीत सकी, जबकि उसके अधिकांश प्रत्याशियों की जमानत जब्त हो गई थी। सपा ने उस चुनाव में छोटे दलों के साथ गठबंधन कर 111 सीटें जीती थीं। इस बार समाजवादी पार्टी अपने परंपरागत और मजबूत सीटों पर किसी तरह का समझौता करने को तैयार नहीं है। इन सीटों पर सपा ने अपने संभावित उम्मीदवारों को पहले ही क्षेत्र में सक्रिय होकर चुनाव की तैयारी शुरू करने के निर्देश दे दिए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव की जीत के बाद, सपा इस विधानसभा चुनाव में कोई चूक नहीं करना चाहती। सीट बंटवारे को अंतिम रूप देने और इसकी घोषणा के लिए जल्द ही दिल्ली में एक अहम बैठक होने वाली है।



