नई दिल्ली। ट्रेन में सफर के दौरान मोबाइल पर तेज आवाज में गाने, वीडियो या रील्स चलाना अब आपको मुसीबत में डाल सकता है। दक्षिण रेलवे ने ऐसे यात्रियों के खिलाफ सख्ती के निर्देश जारी किए हैं, जिनकी हरकतों से दूसरे यात्रियों को असुविधा होती है। रेलवे के सर्कुलर में 1,000 रुपए तक के जुर्माने और जरूरत पड़ने पर उस व्यक्ति को ट्रेन से उतारा जा सकता है। ट्रेन में सफर के दौरान अगर आपकी भी मोबाइल पर तेज आवाज में रील, वीडियो या गाने चलाते हैं तो संभल जाइए। अब आपके खिलाफ यात्री शिकायत कर सकते हैं और फिर आप पर एक्शन भी हो सकता है।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण रेलवे ने ऐसे यात्रियों के खिलाफ सख्ती करने के निर्देश जारी किए हैं। रेलवे का कहना है कि सार्वजनिक जगहों पर मोबाइल के स्पीकर से तेज आवाज में कंटेंट चलाना दूसरे यात्रियों के लिए परेशानी का सबब बनता है।
इस तरह की हरकतों पर रोक लगाने के लिए यात्रियों को नियमों के प्रति जागरूक किया जाएगा और उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई भी हो सकती है। दक्षिण रेलवे ने अपने सभी डिवीजनों को भेजे गए सर्कुलर में रेलवे स्टेशनों और ट्रेन के डिब्बों में मोबाइल पर तेज आवाज में संगीत या वीडियो चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता जताई। रेलवे के मुताबिक मोबाइल इंटरनेट की आसान उपलब्धता के कारण सार्वजनिक जगहों पर स्पीकर मोड में वीडियो और अन्य कंटेंट चलाना आम होता जा रहा है। इससे सहयात्रियों को असुविधा होती है और सफर का माहौल खराब होता है।रिपोर्ट के मुताबिक दक्षिण रेलवे ने संबंधित कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए अधिकारियों को ऐसे मामलों में कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इस सर्कुलर के मुताबिक दोषी यात्री पर 1000 रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर उसे ट्रेन के कोच से हटाया भी जा सकता है।
वहीं अगर किसी ने इस बाबत हंगामा किया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है। रेलवे ने जुलाई 2012 में जारी बोर्ड के पुराने निर्देश का भी हवाला दिया। उस समय मोबाइल पर तेज आवाज में बात करने, लंबी बातचीत करने और आपत्तिजनक रिंगटोन बजाने जैसी आदतों को लेकर चिंता जताई गई थी। अब मोबाइल इंटरनेट और वीडियो देखने की बढ़ती आदतों के बीच रेलवे ने यात्रियों को दोबारा जागरूक करने यह कदम उठाया है।दक्षिण रेलवे ने अपने डिवीजनों से कहा है कि स्टेशनों और ट्रेनों में पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए यात्रियों को नियमों की जानकारी दी जाए। यह अभियान क्षेत्रीय भाषाओं के साथ हिंदी और अंग्रेजी में भी चलाया जाएगा।
यात्रियों से तेज आवाज में वीडियो या संगीत चलाने और जोर-जोर से बात करने से बचने की अपील की जाएगी।सार्वजनिक जगहों पर दूसरों को परेशान करने से जुड़ा प्रावधान भी है, जो सार्वजनिक उपद्रव की परिभाषा से संबंधित है। हालांकि, किसी विशेष घटना में कौन-सा कानून लागू होगा, यह उसके तथ्यों और संबंधित कानूनी प्रावधानों पर निर्भर करेगा। रेलवे की इस पहल का मकसद सफर में यात्रियों को शोर-शराबे से राहत दिलाना और सभी के लिए यात्रा को ज्यादा आरामदायक बनाना है। अब ट्रेन में मोबाइल पर वीडियो या गाने सुनते समय ईयरफोन का इस्तेमाल करना ही बेहतर विकल्प होगा।



