नई दिल्ली – कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) को विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम (वीबी-जी राम जी) से बदलने के कदम को ग्रामीण भारत के सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर एक सर्जिकल स्ट्राइक बताया है। कांग्रेस नेता और राज्यसभा में सांसद जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि यह बदलाव ग्रामीण मजदूरों को मिलने वाले आवश्यक सहारे को कमजोर कर देगा। सोशल मीडिया पोस्ट में कांग्रेस नेता रमेश ने महाराष्ट्र की गंभीर स्थिति का हवाला दिया, जहां बीड सहित कई जिलों में बीते एक दशक का सबसे भीषण सूखा पड़ा है। उन्होंने रेखांकित किया कि इसतरह के बेहद चुनौतीपूर्ण समय में, मनरेगा ग्रामीण आबादी के लिए जीवनरेखा और सुरक्षा की गारंटी प्रदान करता था। लेकिन, इस प्रतिष्ठित योजना को वीबी-जी राम जी से बदलना, ग्रामीण भारत को एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच से वंचित करने जैसा है।
विस्तृत जमीनी जांच का हवाला देकर कांग्रेस नेता रमेश ने चौंकाने वाले आरोप लगाए। रिपोर्ट के अनुसार, कई ग्रामीणों को महीनों से कोई काम नहीं मिला है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में उन्हें काम पर लगा हुआ दिखाया गया है। उन्होंने दावा किया कि लोकल राजनेता, जो कथित तौर पर सत्ताधारी दल से जुड़े हैं, मजदूरों की मेहनत की कमाई को हड़प रहे हैं। कांग्रेस नेता रमेश ने केवल भ्रष्टाचार नहीं, बल्कि मजदूरों की मजदूरी की व्यवस्थित चोरी करार दिया। उन्होंने दावे को पुष्ट करने के लिए उत्तर प्रदेश और अन्य भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) शासित राज्यों में सामने आए फर्जी उपस्थिति और क्लोन एप्लीकेशन से जुड़े घोटालों का जिक्र किया। कांग्रेस नेता रमेश ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार ने ग्रामीण मजदूरी चोरी को पूरी तरह से अंजाम दिया है, जिससे देश के सबसे कमजोर तबके को सीधे तौर पर नुकसान हो रहा है।



