चंडीगढ़। भारतीय टीम के पूर्व स्पिनर हरभजन सिंह ने पूर्व कप्तान महेन्द्र सिंह धोनी की जमकर प्रशंसा करते हुए कहा है कि उनकी दौर में किसी भी अनुभवी खिलाड़ी को कोई परेशान नहीं हुई। हरभजन के अनुसार जब धोनी कप्तान बने थे तब उनकी उम्र काफी कम थी जबकि टीम में युवराज सिंह और वीरेंद्र सहवाग सहित कई ऐसे खिलाड़ी थे जो काफी समय से खेल रहे थे। तब धोनी को कप्तान बनाने की सिफारिश महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर ने की थी, हरभजन ने बताया कि धोनी ने टीम को वहीं से आगे बढ़ाया जहां सौरव गांगुली ने छोड़ा था। सबसे अहम बात यह थी कि धोनी ने कभी अपनी लीडरशिप स्टाइल थोपने की कोशिश नहीं की।
उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता था कि वे खिलाड़ियों से उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कैसे निकलवा सकते हैं, और इस काम में वे बहुत माहिर थे। हरभजन ने स्पष्ट किया कि हमें धोनी के कम उम्र में कप्तान बनने से कोई दिक्कत नहीं हुई, क्योंकि यह हमारी समझ से परे नहीं था। उन्होंने समझाया, अकेला कप्तान टीम नहीं चलाता। टीम चलाने के लिए 11 खिलाड़ियों को कप्तान की तरह सोचना पड़ता है। हरभजन ने उदाहरण दिया कि सिर्फ टॉस के लिए धोनी का जाना ही काफी नहीं था; जहीर खान की बेहतरीन गेंदबाजी या हरभजन के विकेट लेने जैसे सामूहिक प्रयासों से ही धोनी बतौर कप्तान अपनी टीम को शानदार कह सकते थे।हरभजन ने धोनी की सबसे बड़ी खासियत उनका शांत स्वभाव बताया। मैदान पर हो या बाहर, धोनी हमेशा शांतचित्त रहते थे। उनके चेहरे के भावों को देखकर आप कुछ भी अंदाज नहीं लगा सकते थे।
कप्तानी के अलावा, हरभजन ने धोनी की विकेटकीपिंग स्किल्स की भी जमकर तारीफ की। उन्होंने इसे अविश्वसनीय बताते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि धोनी से बेहतर कोई विकेटकीपर है। वह बिजली से भी तेज थे, हरभजन ने कहा। हरभजन ने यह भी बताया कि धोनी ने अपनी विकेटकीपिंग में बहुत सुधार किया था। उन्होंने जब पहली बार विकेटकीपिंग की थी और फिर छह महीने बाद, तो उसमें बहुत बड़ा फर्क था। हालांकि, दिलचस्प बात यह थी कि हरभजन ने धोनी को मुश्किल से अपनी विकेटकीपिंग स्किल्स पर काम करते हुए देखा था, जबकि वह अपनी बल्लेबाजी पर बहुत अभ्यास करते थे। बता दें कि धोनी ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में 538 मैचों में बतौर विकेटकीपर 829 शिकार किए, जिसमें 639 कैच और 195 स्टंपिंग शामिल हैं, जो उनकी अद्भुत क्षमता का प्रमाण है।



