सुल्तानपुर। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कथित टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले में सोमवार को बरी कर दिया। विशेष मजिस्ट्रेट शुभम वर्मा की अदालत ने यह फैसला सुनाया। फैसले के समय राहुल गांधी स्वयं अदालत में मौजूद थे। यह मामला वर्ष 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी की ओर से तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के संबंध में दिए गए कथित बयान से जुड़ा है।राहुल गांधी सोमवार सुबह करीब सात बजे अपने आवास से सुल्तानपुर के लिए रवाना हुए थे। अदालत में पेशी के लिए जाते समय पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे पर उनके काफिले के पीछे चल रही कुछ गाड़ियां आपस में टकरा गई थीं। हालांकि, राहुल गांधी सुरक्षित रहे। इससे पहले सुल्तानपुर पहुंचने पर कांग्रेस समर्थकों ने उनका आत्मीय स्वागत किया और उनके समर्थन में नारे लगाए।
2018 में दर्ज हुई थी शिकायत – भाजपा नेता और जिला सहकारी बैंक के पूर्व अध्यक्ष विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का आरोप था कि राहुल गांधी ने बेंगलुरु में एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान अमित शाह पर हत्या के एक मामले में आरोपी होने का उल्लेख करते हुए उनकी राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठाए थे। मिश्रा के मुताबिक, इस टिप्पणी से अमित शाह की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा और यह आपराधिक मानहानि का मामला बनता है। अदालत ने 27 नवंबर 2023 को राहुल गांधी को मुकदमे के संबंध में तलब किया था। इसके बाद राहुल गांधी अदालत में पेश हुए थे और उन्हें जमानत मिल गई थी। मुकदमे की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता की ओर से राहुल गांधी के वॉयस सैंपल लेने की मांग भी की गई, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इस आवेदन को खारिज कर दिया।
राहुल गांधी ने आरोपों से किया था इनकार – राहुल गांधी ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों से इनकार किया था। उनका पक्ष था कि शिकायत राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित है और बयान देने के पीछे किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने का इरादा नहीं था। मामले में दोनों पक्षों की बहस 13 अक्टूबर को पूरी हो गई थी। इसके बाद अदालत ने फैसले के लिए सोमवार की तारीख निर्धारित की थी। अदालत के बरी करने के फैसले से इस मामले में राहुल गांधी के खिलाफ चल रही आपराधिक मानहानि की कार्यवाही समाप्त हो गई।



