नई दिल्ली। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि ब्रिक्स देशों में दुनिया की करीब आधी आबादी रहती है। ऐसे में इन देशों के बीच सहयोग, जन-केंद्रित विकास और वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए संसदों की भूमिका बहुत अहम है। लोकसभा अध्यक्ष ने संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच को संबोधित करते हुए यह बात कही।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में दो दिवसीय 26 और 27 अक्टूबर को 12वें ब्रिक्स संसदीय फोरम का आयोजन किया जा रहा है। इस दो दिवसीय कार्यक्रम में ब्रिक्स के 11 सदस्य देशों और 10 साझेदार देशों के संसदीय प्रतिनिधिमंडल शामिल हो रहे हैं। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि इस साल ब्रिक्स संसदीय मंच की स्थापना के 20 साल पूरे हो रहे हैं।
इस संगठन का तेजी से विस्तार हो रहा है और वैश्विक घटनाक्रमों और अंतरराष्ट्रीय संबंधों को प्रभावित करने की इसकी क्षमता लगातार बढ़ रही है।उन्होंने कहा कि ब्रिक्स देश दुनिया की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करते हैं और पृथ्वी के करीब एक-तिहाई भूभाग में फैले हुए हैं। इसके अलावा वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी इनकी अहम भूमिका है। यह हमारी सामूहिक ताकत के साथ-साथ वैश्विक जिम्मेदारियों को भी दर्शाता है। भौगोलिक स्थिति, संस्कृति, भाषा और सामाजिक संरचना के लिहाज से ब्रिक्स देशों में भले ही अंतर हो, लेकिन हम साझा लोकतांत्रिक मूल्यों और पूरी मानवता के प्रति अपनी सामूहिक जिम्मेदारी के सूत्र में बंधे हुए हैं।
ओम बिरला ने भारत और रूस के बीच लंबे समय से चले आ रहे मैत्रीपूर्ण संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों देशों की दोस्ती आपसी विश्वास, सम्मान और साझा आकांक्षाओं पर आधारित है! उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की लड़ाई में रूस के लगातार समर्थन की सराहना की. बिरला ने कहा कि वैश्विक शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए अंतरराष्ट्रीय समुदाय को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर दृढ़ संकल्प के साथ खड़ा होना चाहिए।ओम बिरला ने कहा कि सहयोग के प्रयासों में जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने ब्रिक्स देशों की संसदों के बीच सहयोग मजबूत करने के लिए रूस की सक्रिय भागीदारी का आह्वान किया।
बिरला ने जलवायु परिवर्तन और आतंकवाद जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए सामूहिक कार्रवाई की जरूरत बताई. साथ ही, उन्होंने बदलती वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में सुधार करने पर जोर दिया, ताकि ये संस्थान मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं के प्रति अधिक प्रभावी और जवाबदेह बन सकें। रूस के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक से पहले ओम बिरला ने क्यूबा, मिस्र और बेलारूस के संसदीय प्रतिनिधिमंडलों से भी मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों और संसदीय सहयोग को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच के दौरान चार उच्चस्तरीय सत्र आयोजित किए जाएंगे।



