नई दिल्ली। भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा उद्योग बन गया है। सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि देश का ऑटोमोबाइल उद्योग 22 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने विश्वास जताया कि मौजूदा वृद्धि जारी रहने पर भारत अगले पांच वर्षों में दुनिया का सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल उद्योग बन सकता है।नई दिल्ली में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि देश में सड़कों, एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों के तेजी से निर्माण से परिवहन व्यवस्था में सुधार हुआ है।
बेहतर सड़क संपर्क का असर माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स लागत पर भी पड़ा है। उनके मुताबिक, देश में अच्छी सड़कों के निर्माण से लॉजिस्टिक्स लागत में छह प्रतिशत की कमी आई है। उन्होंने कहा कि एक्सप्रेसवे और राजमार्गों के निर्माण से यात्रा का समय घटा है। इसके साथ ही इन मार्गों के आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों और बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिली है। बेहतर सड़क नेटवर्क से परिवहन अधिक सुगम होने के साथ कारोबार और औद्योगिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिल रहा है।
ऊर्जा क्षेत्र में किसानों की भूमिका अहम – गडकरी ने ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारतीय किसान हाइड्रोजन और अन्य मूल्यवान ऊर्जा उत्पादों के उत्पादन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। इससे इन उत्पादों के लिए आयात पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि हाइड्रोजन उत्पादन में वृद्धि के साथ भारत भविष्य में ऊर्जा निर्यातक देश के रूप में भी उभर सकता है। इसके लिए घरेलू स्तर पर ऊर्जा उत्पादन बढ़ाने और उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग करने की आवश्यकता है। गडकरी के मुताबिक, सड़क अवसंरचना का विस्तार, परिवहन लागत में कमी और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों को बढ़ावा देना देश की आर्थिक प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं। ऑटोमोबाइल उद्योग में वृद्धि के साथ इन क्षेत्रों में सुधार भारत की औद्योगिक क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।



