नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) छोड़कर दूसरे दलों का दामन थामने वाले करीब 20 सांसदों की सदस्यता पर फैसला कब होगा? इस सवाल पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बड़ा अपडेट दिया है। उन्होंने बताया कि इन सांसदों ने अयोग्यता से जुड़ी कार्यवाही के लिए एक बार फिर समय बढ़ाने की मांग की है, और यह पांचवीं बार है जब उन्होंने अतिरिक्त समय मांगा है। इन सांसदों में सायनी घोष और यूसुफ पठान जैसे प्रमुख चेहरे भी शामिल हैं, जिन्होंने एनडीए घटक दल नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया का रुख किया है। ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने दल-बदल विरोधी कानून के तहत इन सांसदों की सदस्यता समाप्त करने की मांग की है। लोकसभा अध्यक्ष बिरला इस अनुरोध पर विचार कर रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय में आया है जब लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने संसद में बहस और संवाद की जरूरत पर जोर दिया है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अलग-अलग विचार और मतभेद होना स्वाभाविक है, लेकिन सभी मुद्दों पर संसद में सार्थक चर्चा होनी चाहिए। बातचीत के जरिए ही समस्याओं का समाधान तलाशा जा सकता है और आगे का रास्ता निकल सकता है। उनका यह बयान नेता विपक्ष राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती देने और चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के तेज होते विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है। विपक्ष विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत मतदाता सूचियों में संशोधन को लेकर चुनाव आयोग पर निशाना साध रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग कर रहा है। ओम बिरला बुधवार को तिरुवनंतपुरम में संसद और राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं की लोक लेखा समितियों के अध्यक्षों के सम्मेलन से इतर मीडिया से बातचीत कर रहे थे।
उन्होंने दोहराया कि विचारों में अंतर होना सामान्य बात है, लेकिन संसद में हर विषय पर उपयोगी और सार्थक चर्चा होनी चाहिए, जिससे मुद्दों को सुलझाने में मदद मिलेगी।संसद की अगली बैठक को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। संसद का मॉनसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अभी तक सत्रावसान की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है। इसका मतलब है कि सरकार जरूरत पड़ने पर मौजूदा सत्र को कम समय के नोटिस पर दोबारा बुलाने का विकल्प खुला रखे हुए है, हालांकि सरकार ने अभी तक किसी विशेष सत्र को बुलाने का फैसला घोषित नहीं किया है।इसके अतिरिक्त, लोकसभा अध्यक्ष ने अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों के लिए चलाई जा रही छात्रवृत्ति योजनाओं में कथित अनियमितताओं से जुड़ी सुनवाई में छह राज्यों के मुख्य सचिवों की गैरमौजूदगी के मामले पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बताया कि लोक लेखा समिति के अध्यक्ष केसी वेणुगोपाल की ओर से भेजे गए नोटिस की जांच की जा रही है। वेणुगोपाल ने 22 अक्टूबर को लिखे पत्र में उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, पंजाब, ओडिशा, बिहार और मध्य प्रदेश के मुख्य सचिवों के सुनवाई में शामिल नहीं होने का मुद्दा उठाया था।



