नई दिल्ली । जीएसटी काउंसिल ने गुरुवार को टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति खत्म कर दी। वित्त मंत्रालय ने घोषणा की कि मुकदमा चलाने की सीमा भी 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। वित्त मंत्रालय ने कहा कि रेट का स्ट्रक्चर तय हो चुका है, इसलिए काउंसिल अब इस बात पर ध्यान दे रही है कि टैक्स रोजाना कैसे काम करता है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि जीएसटी रेट में बदलाव अब साल में एक बार होगा।57वीं जीएसटी काउंसिल ने इनपुट टैक्स क्रेडिट दावों पर अधिकारियों की एक कमेटी बनाने का फैसला किया। यह कमेटी इस बात की जांच करेगी कि उस असली खरीदार को कैसे बचाया जाए जिसके पास सही इनवॉइस है, जिसे सामान मिल गया है और जिसने अपने सप्लायर को पूरा पेमेंट कर दिया है।
मंत्रालय ने कहा कि अधिकारियों की कमेटी तीन महीने के भीतर अपनी स्टडी पूरी कर लेगी और अगली काउंसिल मीटिंग में एजेंडा पेश किया जाएगा। जीएसटी काउंसिल ने जीएसटी अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्तियां वापस ले लीं। मुकदमा चलाने की सीमा 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये कर दी गई है। कम से कम सज़ा का प्रावधान हटा दिया गया है। काउंसिल के फैसले के अनुसार, हर मामले में सजा (चाहे जुर्माना हो, जेल हो या दोनों) अदालत के विवेक पर छोड़ दी गई है। मंत्रालय ने कहा कि सामान्य जुर्माना, जो उन मामलों में लागू होता है जहां कोई खास जुर्माना तय नहीं है, 25,000 रुपये से घटाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है।



