लखनऊ : बहुजन समाज पार्टी ने 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव को लेकर बड़ा फैसला लिया है। पार्टी सुप्रीमो मायावती ने गठबंधन को लेकर भी रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा है पार्टी गठबंधन नहीं करेगी। मायावती ने पंजाब को लेकर विस्तृत समीक्षा की और उत्तर प्रदेश और उत्तराखण्ड राज्य के साथ ही अगले साल के शुरु में होने वाले विधानसभा चुनाव में कर्मठ व ईमानदार लोगों को पार्टी का उम्मीदवार बनाने पर विशेष बल दिया।
मायावती ने कहा कि अच्छा रिजल्ट लाकर पंजाब की सत्ताधारी आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और बीजेपी के जनविरोधी रवैयों से दुखी एवं त्रस्त राज्य की जनता को बसपा के जरिए गरीबी, बेरोजगारी आदि से मुक्त एवं आत्म-सम्मान युक्त सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय की अम्बेडकरवादी नीतियों व कार्यक्रमों का सही लाभ मिल सके, जो महान संतगुरु संत रविदास जी, परमपूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर और उनके अनुयायी बसपा के जन्मदाता और संस्थापक कांशीराम जी के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
उन्होंने कहा कि बसपा की पिछली आल इण्डिया की हुई बैठक में पार्टी संगठन को पोलिंग बूथ स्तर तक तैयार करने और जनाधार को बढ़ाने आदि को लेकर दिए दिशा-निर्देशों सम्बंधी फीडबैक लेने के बाद उल्लेखित कमियों को समयबद्ध तरीके से सुधार करने के लिए नए दिशा-निर्देश देते हुए मायावती ने कहा कि पंजाब राज्य में पार्टी संगठन को आगामी 9 अक्टूबर को होने वाले कांशीरामजी की पुण्यतिथि के कार्यक्रम को पिछली वर्ष के दिशा-निर्देशानुसार ही पूरी तैयारी के साथ सफल बनाना है। इसके साथ ही अगले साल 15 जनवरी 2027 को आयोजित होने वाले जनकल्याणकारी दिवस के मौके पर बसपा के आर्थिक सहयोग को बसपा पंजाब स्टेट यूनिट को पिछली बार से ज्यादा बेहतर करना है जो अम्बेडकरवादी कारवों व मूवमेन्ट को आगे बढ़ाने के लिये जरूरी है।
बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बारे में मायावती ने कहा कि बसपा पंजाब का चुनाव भी, उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड राज्य की तरह, बिना किसी से कोई गंठबंधन और समझौता किए हुए अकेले ही लड़ेगी, जिसकी खास वजह चुनावी गठबंधन से बसपा को सीट और वोट प्रतिशत दोनों में होने वाले घाटे को लेकर पार्टी के लोगों के मनोबल को गिराने से बचाना है। ऐसे में विरोधियों के सभी साम, दाम, दण्ड, भेद आदि हथकण्डों का डट कर सामना करते हुए बेहतर रिज़ल्ट लाने के लिए पूरी तैयारी जारी रखनी है।



