लखनऊ। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ की दिल्ली यात्रा और बीजेपी के शीर्ष नेतृत्व के साथ बैठकों ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है। शुक्रवार को नोएडा में गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद सीएम योगी ने शनिवार को दिल्ली में पीएम मोदी से बैठक की और उसके बाद बीजेपी अध्यक्ष नितिन नबीन से भी मिले। यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले हो रही ये बैठकें, केवल एक प्रशासनिक कवायद नहीं, बल्कि राज्य की राजनीति और संगठन में बड़े बदलावों की आहट मानी जा रही हैं।
इन बैठकों के केंद्र में यूपी की 10 राज्यसभा सीटों के आगामी चुनाव भी हैं, जिन्हें 2027 के विधानसभा चुनाव का सेमीफाइनल माना जा रहा है। बीजेपी अपने कोटे की 8 सीटों के लिए उम्मीदवारों के नामों पर गहराई से मंथन कर रही है। इसमें पुराने चेहरों को दोहराने या नए क्षेत्रीय-जातिगत समीकरणों को साधने पर विचार कर रही है। ओबीसी, दलित, ब्राह्मण और क्षत्रिय संतुलन को साधकर ऐसे चेहरों को संसद भेजने की रणनीति है, जो समाजवादी पार्टी के पीडीए कार्ड की काट बन सकें।
माना जा रहा है कि पीएमए मोदी और नितिन नबीन के साथ योगी ने इन्हीं नामों को अंतिम रूप देने पर चर्चा की।मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक हाल ही में एसआईआर को लेकर विपक्ष, खासकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने चुनाव आयोग का रुख कर धांधली के गंभीर आरोप लगाए थे। इस तनातनी के मद्देनजर, शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई चर्चा में चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत पूरी पारदर्शिता से मतदाता सूची को दुरुस्त करने की रणनीति बनाई गई है। बीजेपी आलाकमान का स्पष्ट संदेश है कि चुनाव आयोग के साथ किसी भी टकराव से बचा जाए।
नबीन का कार्यभार संभालने के बाद उत्तर प्रदेश के चुनावी प्रबंधन पर यह पहली औपचारिक मंथन बैठक थी, जिसमें राज्य सरकार की उपलब्धियों और नए अभियानों की रूपरेखा तैयार की गई। रिपोर्ट के मुताबिक चर्चाएं जोरों पर हैं कि विधानसभा चुनाव से पहले राज्य मंत्रिमंडल में रिक्त पदों को भरने और संगठन में युवा चेहरों को बड़ी जिम्मेदारियां सौंपने पर भी फैसला हो सकता है। 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद बीजेपी उत्तर प्रदेश में कोई जोखिम नहीं लेना चाहती, इसलिए ये मैराथन बैठकें कर रही हैं कि पार्टी 2027 के लिए पूरी तरह चुनावी मोड में है, और जल्द ही उम्मीदवारों व संगठनात्मक फैसलों का बड़ा एलान हो सकता है।



