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 पंजाब कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर असमंजस खत्म, हाईकमान ने संतुलन साधने की रणनीति अपनाई

चंडीगढ़ । पंजाब में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए लंबे समय से चल रही नेतृत्व संबंधी अटकलों पर आखिरकार विराम लग गया है। पार्टी नेतृत्व कई दिनों से संगठन और चुनावी रणनीति के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहा था। अंततः कांग्रेस ने बड़े बदलाव के बजाय मौजूदा नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए अनुभव और सामाजिक समीकरणों को साधने का फैसला किया है। कांग्रेस ने अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष के पद पर बरकरार रखा है। वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा भी अपने पद पर बने रहेंगे।

पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस फैसले को जाट सिख और दलित समुदायों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। दरअसल, पिछले कई सप्ताह से कांग्रेस के भीतर नेतृत्व परिवर्तन को लेकर लगातार मंथन चल रहा था। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं, सांसदों, विधायकों और संगठन के पदाधिकारियों से राय ली गई थी। हाईकमान के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि संगठन में बदलाव किया जाए या मौजूदा नेतृत्व के साथ ही चुनावी मैदान में उतरा जाए। अंततः पार्टी ने किसी बड़े फेरबदल से बचते हुए निरंतरता को प्राथमिकता दी।

हालांकि, इस फैसले के बाद भी पार्टी के भीतर कुछ असंतोष सामने आया है। वरिष्ठ सांसद मनीष तिवारी को नई जिम्मेदारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने सोशल मीडिया पर एक सांकेतिक संदेश साझा किया, जिसे उनकी नाराजगी के रूप में देखा जा रहा है। इसके बावजूद कांग्रेस नेतृत्व का मानना है कि तय किया गया नया संगठनात्मक ढांचा आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी को मजबूती देगा और आंतरिक गुटबाजी पर भी लगाम लगाने में मदद करेगा।

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