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तालाबों में गंदा पानी नहीं जाना चाहिए, ट्रीटमेंट के बाद ही तालाब में पहुंचे पानी : मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ़- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए कि प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में बने तालाबों को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के साथ-साथ इनके रखरखाव पर भी विशेष ध्यान दिया जाए। किसी भी तालाब में गंदा पानी सीधे न जाए, इसके लिए पानी को वैज्ञानिक तरीके से ट्रीट करने के बाद ही तालाब में पहुंचाने की व्यवस्था की जाए। मुख्यमंत्री मंगलवार को हरियाणा सिविल सचिवालय में हरियाणा पॉन्ड एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी की बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि तालाबों के सौंदर्यीकरण के साथ इनके आसपास ग्रामीणों के लिए बेहतर सुविधाएं भी विकसित की जाएं। उन्होंने निर्देश दिए कि जिन गांवों में नई योगशालाएं बनाना प्रस्तावित हैं, वहां तालाबों के आसपास शेड इत्यादि लगाकर योगशालाएं बनाई जाएं और ओपन जिम की व्यवस्था की जाए। इससे ग्रामीण इन स्थानों पर नियमित रूप से आएंगे और तालाबों की देखभाल में भी रुचि लेंगे।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कुल 20,100 तालाब हैं, जिनमें 19,219 ग्रामीण और 881 शहरी क्षेत्रों में हैं। इनमें से जो तालाब प्रदूषित एवं ओवरफ्लोइंग हैं, उनपर खासा फोकस किया जा रहा है।  गांवों के ग्रे और ब्लैक वाटर को ट्रीट करने पर भी रणनीति बनाई जा रही है। इसके लिए तालाब से बाहर वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथवा एसटीपी की व्यवस्था की जा सकती है। गांव या पंचायत की जमीन का उपयोग इसके लिए किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि ग्रामीण क्षेत्रों में माइक्रो एसटीपी की व्यवस्था के लिए भी कार्य किया जाए तथा तालाब में पानी पहुंचने से पहले आवश्यक प्री-ट्रीटमेंट सुनिश्चित किया जाए।बैठक में मैकेनिकल एरेशन और नैनोबबल टेक्नोलॉजी जैसी तकनीकों पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन तकनीकों का पायलट प्रोजेक्ट के रूप में इस्तेमाल किया जाए और परिणाम कारगर पाए जाने पर इन्हें अन्य तालाबों में भी लागू किया जाए।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने निर्देश दिए कि 320 तालाबों के नवीनीकरण एवं सौंदर्यीकरण का चल रहा कार्य तेजी से पूरा किया जाए। साथ ही 467 नए तालाबों को चिन्हित कर वहां भी कार्य शुरू किया जाए। उन्होंने पूर्ण हो चुके तालाबों के रखरखाव के लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश भी दिए। मुख्यमंत्री ने तालाबों पर लगे सोलर पंपों के आसपास ऊंचे स्तर पर पानी के फिल्ट्रेशन की व्यवस्था करने तथा सोलर पंपों के रखरखाव पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए।बैठक में अधिकारियों ने 350 अमृत सरोवरों की स्थिति से भी अवगत कराया। मुख्यमंत्री ने पूर्ण किए गए तालाबों के बेहतर उपयोग और रखरखाव को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए। गांवों के तालाबों में मत्स्य पालन के लिए भविष्य में किए जाने वाले आवंटन/नीलामी को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत करने तथा तालाबों के सार्वजनिक हित में बेहतर उपयोग पर ध्यान देने को कहा।

विशेष मैकेनिज्म विकसित किया जाएगा – इस दौरान अधिकारियों ने बताया कि ‘म्हारी सड़क’ ऐप की तर्ज पर तालाबों के लिए भी एक विशेष मैकेनिज्म विकसित किया जाएगा। इसके माध्यम से आमजन तालाब की खस्ता हालत अथवा सुधारीकरण से संबंधित शिकायत लोकेशन टैगिंग के साथ दर्ज कर सकेंगे। शिकायत संबंधित सरपंच और अधिकारियों को भेजी जाएगी, ताकि उस पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

 एडीसी करेंगे समीक्षा, रख रखाव की बनेगी रिपोर्ट – तालाबों की मेंटेनेंस के लिए विकास एवं पंचायत विभाग के बजट का 5 प्रतिशत उपलब्ध कराने का प्रावधान किया गया है। साथ ही  वीबीजीरामजी को भी इससे जोड़ते हुए कार्य करने के बारे विशेष निर्देश दिए। विकास एवं पंचायत विभाग के अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को बताया कि हर गांव में तालाबों के रखरखाव के लिए समिति बनाई गई है, जिसमें सरपंच को अध्यक्ष तथा ग्राम सचिव सहित संबंधित प्रतिनिधियों को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन समितियों के कार्यों की नियमित समीक्षा की जाए। प्रत्येक जिले में एडीसी स्तर पर समीक्षा बैठक कर यह रिपोर्ट ली जाए कि संबंधित समितियों ने अब तक तालाबों के रखरखाव के लिए क्या-क्या कार्य किए हैं। संबंधित समितियां तालाबों पर लगे सोलर पंपों के रखरखाव का भी ध्यान रखें।

 हरियाणा पॉन्ड एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी रखेंगी हर पहलू पर नजर – मुख्यमंत्री ने तालाबों के डिजाइन और ड्रॉइंग की समीक्षा एवं मानकीकरण पर भी जोर दिया, ताकि अलग-अलग स्थानों पर किए जाने वाले कार्यों में एकरूपता और गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि तालाबों के नवीनीकरण, सौंदर्यीकरण और रखरखाव के कार्य में जिस अधिकारी की जिम्मेदारी होगी, उसकी जवाबदेही भी तय होगी। लापरवाही मिलने पर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने हरियाणा पॉन्ड एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी को समय-समय पर निरीक्षण करने तथा गुणवत्ता से समझौता मिलने पर कार्रवाई की सिफारिश करने के निर्देश भी दिए। बैठक में ग्रामीण आबादी के अंदर बने तालाबों को सार्वजनिक उपयोग की दृष्टि से ग्रामीण आबादी से बाहर विकसित करने के संबंध में भी आवश्यक निर्देश दिए गए।

 तालाबों को गांव की खूबसूरती से जोड़ने की दिशा में काम – हरियाणा पॉन्ड एंड वेस्ट वाटर मैनेजमेंट अथॉरिटी के कार्यकारी उपाध्यक्ष श्री विमल गोस्वामी ने कहा कि सरकार का उद्देश्य तालाबों को साफ-सुथरा और सुंदर बनाकर गांवों की खूबसूरती से जोड़ना है। इसी दिशा में तालाबों की सफाई, पानी की गुणवत्ता सुधारने और बेहतर रखरखाव पर काम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जो निर्देश दिए है, उन नई तकनीकों का इस्तेमाल पहले पायलट प्रोजेक्ट के रूप में किया जाएगा और अच्छे परिणाम मिलने पर इन्हें अन्य तालाबों में भी अपनाया जाएगा। गांव की समितियों को भी तालाबों की देखभाल से जोड़ा जा रहा है। प्रयास है कि साफ पानी और सुंदर परिसर वाले तालाब गांव में लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनें। इस दौरान मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता, विकास एवं पंचायत विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विजयेंद्रा कुमार, मुख्यमंत्री के उप प्रधान सचिव डॉ यशपाल सिंह, विकास एवं पंचायत विभाग के निदेशक अनीश यादव भी मौजूद थे।

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