नई दिल्ली। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके परिवार से जुड़े मौलाना मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट तथा मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच आगे बढ़ने के साथ कुछ अन्य लोगों और संस्थाओं पर भी जांच का दायरा बढ़ सकता है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, हालिया छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों की पड़ताल में कथित तौर पर कुछ संदिग्ध और फर्जी फर्मों से संबंधित जानकारी सामने आई है।
ईडी जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े चंदे तथा सरकारी परियोजनाओं के ठेकेदारों के माध्यम से कराए गए निर्माण कार्यों में कथित वित्तीय अनियमितताओं की मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू से जांच कर रही है। एजेंसी ने पिछले महीने रामपुर, सहारनपुर और दिल्ली में कई ठिकानों पर तलाशी ली थी। सहारनपुर में चार्टर्ड अकाउंटेंट दीपक गुप्ता के आवास और कार्यालय पर हुई तलाशी के दौरान एजेंसी ने कई दस्तावेज जब्त किए थे। सूत्रों के अनुसार, इन दस्तावेजों की जांच में कुछ ऐसी फर्मों का पता चला है, जिनके माध्यम से कथित तौर पर संदिग्ध लेनदेन किए गए और रकम को दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया। एजेंसी ने कुछ बैंक खातों का विवरण भी जुटाया है और संबंधित लेनदेन की जांच की जा रही है।
जांच के दायरे में यह आरोप भी है कि सरकारी परियोजनाओं से जुड़े ठेकेदारों के फंड को कथित तौर पर निजी ठेकेदारों के माध्यम से ट्रांसफर किया गया और इसका इस्तेमाल यूनिवर्सिटी-ट्रस्ट से संबंधित संपत्तियां तैयार करने में किया गया। कुछ ठेकेदारों और ट्रस्ट के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की भी पड़ताल की जा रही है। ईडी अब जब्त दस्तावेजों, बैंक खातों और संबंधित फर्मों के बीच हुए लेनदेन को जोड़कर कथित वित्तीय नेटवर्क की जांच कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, जांच में नए तथ्य सामने आने पर संदिग्ध फर्मों से जुड़े लोगों और अन्य ठिकानों पर कार्रवाई की जा सकती है। हालांकि, ईडी ने अभी किसी नई छापेमारी या कार्रवाई की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।



