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आशा वर्करों और आशा फैसिलिटेटरों के लिए 30 लाख रुपये का दुर्घटना बीमा तथा 5 लाख रुपये का प्राकृतिक मृत्यु जीवन बीमा कवर सुनिश्चित किया: हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़-आशा वर्कर्स एंड फैसिलिटेटर्स यूनियन, पंजाब ने आज पंजाब के वित्त मंत्री और कैबिनेट सब-कमेटी के चेयरमैन, एडवोकेट हरपाल सिंह चीमा का उन्हें एक ऐतिहासिक जीवन बीमा योजना उपलब्ध करवाने में निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका के लिए औपचारिक रूप से गहरा आभार व्यक्त किया। विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ हुई व्यापक विचार-विमर्श की श्रृंखला के दौरान वित्त मंत्री से मुलाकात करते हुए यूनियन ने नए लागू किए गए वित्तीय सुरक्षा उपायों का स्वागत किया। इसी दौरान वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने परिवहन, कृषि और शैक्षणिक गैर-शिक्षण यूनियनों की मांगों और मुद्दों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागों को सेवाओं को नियमित करने तथा वेतन वृद्धि से संबंधित सभी जायज मांगों पर तुरंत कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए।

इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान आशा वर्कर्स एंड फैसिलिटेटर्स यूनियन के प्रतिनिधियों ने वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा उनके कल्याण के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की। यूनियन के प्रतिनिधियों ने कहा, “वित्त मंत्री ने पूरे राज्य की आशा वर्करों और फैसिलिटेटरों के लिए दुर्घटनाग्रस्त मृत्यु की स्थिति में 30 लाख रुपये तथा प्राकृतिक मृत्यु के मामले में 5 लाख रुपये का जीवन बीमा कवर सुनिश्चित करने में निर्णायक भूमिका निभाई है।” यूनियन ने कहा कि इससे उनकी लंबे समय से लंबित मांग पूरी हुई है, जिससे अग्रिम पंक्ति में कार्यरत हजारों स्वास्थ्य सेवा फैसिलिटेटरों और उनके परिवारों को महत्वपूर्ण वित्तीय सुरक्षा मिलेगी।

अपना आभार व्यक्त करने के साथ-साथ यूनियन नेतृत्व ने केंद्र सरकार द्वारा बंद किए गए कुछ प्रशासनिक भत्तों के संबंध में एक और गंभीर चिंता भी उठाई। उन्होंने पंजाब सरकार से इस मामले में औपचारिक हस्तक्षेप करने तथा इन लाभों की बहाली के लिए पैरवी करने की अपील की। इस मुद्दे का तत्काल संज्ञान लेते हुए वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग को इन बंद किए गए भत्तों के संबंध में एक व्यापक रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए और प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार इस मुद्दे को केंद्र सरकार के समक्ष पूरी मजबूती और प्रभावशीलता के साथ उठाएगी। कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए वित्त मंत्री ने छह अन्य प्रमुख कर्मचारी संगठनों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ भी विस्तृत चर्चा की।

इनमें कॉन्ट्रैक्ट पी.आर.टी.सी. वर्कर्स यूनियन, पंजाब रोडवेज (पनबस) स्टेट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन, पंजाब रोडवेज पनबस/पी.आर.टी.सी. कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन, पंजाब ट्रांसपोर्ट स्टाफ एसोसिएशन, संयुक्त आत्मा पंजाब एसोसिएशन (सापा) तथा टेट पास नॉन-टीचिंग स्टाफ यूनियन शामिल थे।इन यूनियनों के साथ हुई चर्चा मुख्य रूप से ठेका आधारित सेवाओं को नियमित करने, वेतन संशोधन तथा अन्य लंबित विभागीय मामलों जैसे प्रमुख मुद्दों पर केंद्रित रही। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने प्रत्येक यूनियन की शिकायतों को बहुत ध्यानपूर्वक सुना और दोहराया कि राज्य सरकार कर्मचारियों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई करने तथा सभी जायज मांगों का निर्धारित समय सीमा के भीतर समाधान करने के आदेश दिए।

बैठकों के दौरान आशा वर्कर्स एंड फैसिलिटेटर्स यूनियन की ओर से किरनदीप कौर, जसवीर कौर और परमजीत कौर; कॉन्ट्रैक्ट पी.आर.टी.सी. वर्कर्स यूनियन की ओर से हरविंदर सिंह, गुरधियान सिंह और मनजिंदर कुमार; पंजाब रोडवेज (पनबस) स्टेट ट्रांसपोर्ट वर्कर्स यूनियन की ओर से हरमिंदर सिंह, लखविंदर सिंह, बचित्तर सिंह और जगदीप सिंह; पंजाब रोडवेज पनबस/पी.आर.टी.सी. कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स यूनियन की ओर से रेशम सिंह गिल, शमशेर सिंह, हरकेश सिंह और रोही राम; पंजाब ट्रांसपोर्ट स्टाफ एसोसिएशन की ओर से हरमीत सिंह, जजिंदर सिंह, सुखचैन सिंह और कुलदीप सिंह; संयुक्त आत्मा पंजाब एसोसिएशन (सापा) की ओर से गुरप्रताप सिंह औलख, शमिंदर सिंह बराड़, वरिंदर सिंह और सतनाम सिंह; तथा टैट पास नॉन-टीचिंग स्टाफ यूनियन की ओर से गुरविंदर सिंह, कुलदीप सिंह और मनविंदर पाल ने अपनी-अपनी यूनियनों का प्रतिनिधित्व किया।

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