नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पर विस्तृत चर्चा हुई। वर्ष 2024 में बने कानून में संशोधन के लिए लाए गए इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। सरकार ने इसे परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया, जबकि विपक्ष ने इसे अपर्याप्त बताते हुए सरकार की नीतियों और छात्र आंदोलनों के दौरान हुई कार्रवाई पर सवाल उठाए।
विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि संशोधन का उद्देश्य सार्वजनिक परीक्षाओं में पेपर लीक और अन्य अनुचित गतिविधियों पर प्रभावी रोक लगाना है। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता बनाए रखने और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। वहीं कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने सरकार पर शिक्षा के प्रति गंभीर नहीं होने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक केवल दिखावे का प्रयास है और वास्तविक सुधारों की आवश्यकता है। गोगोई ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाते हुए पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन के इस्तेमाल का आदेश किसने दिया। उन्होंने सरकार से इस संबंध में जवाब देने की मांग की।
जुमले दे रही सरकार: अखिलेश
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार अपने वादों को पूरा करने के बजाय केवल जुमले देती है। उन्होंने कहा कि युवाओं और छात्रों के मुद्दों पर ठोस समाधान की जरूरत है, न कि केवल नए कानूनों की।दोपहर बाद सदन की कार्यवाही शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बताया कि विधेयक पर चर्चा के लिए प्रारंभिक रूप से छह घंटे का समय निर्धारित किया गया था। उन्होंने कहा कि यदि सत्ता पक्ष और विपक्ष सहमत हों तो चर्चा का समय बढ़ाया जा सकता है।
इस पर संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने बताया कि सरकार ने सभी दलों से बातचीत के बाद चर्चा की अवधि बढ़ाकर आठ घंटे करने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो सरकार 10 घंटे तक भी चर्चा कराने के लिए तैयार है, ताकि सभी दलों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर मिल सके।



