चंडीगढ़ : आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और अंतर-राज्यीय समन्वय को बढ़ावा देने के एक बड़े प्रयास के रूप में, पंजाब पुलिस ने आज सीमा पार से आतंकवाद, गैंगस्टर सिंडिकेट्स, संगठित अपराध नेटवर्क और साइबर अपराध के खिलाफ साझा रणनीतियाँ तैयार करने के लिए 10वीं उत्तरी क्षेत्रीय पुलिस समन्वय समिति (एन.आर.पी.सी.सी.) बैठक की मेजबानी की। इस उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) पंजाब गौरव यादव ने की। इसमें बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (बी.एस.एफ.) वेस्टर्न कमांड चंडीगढ़ के विशेष निदेशक महानिदेशक सतीश एस. खंडारे, इंडो-तिब्बतीयन बॉर्डर पुलिस (आई.टी.बी.पी.) मुख्यालय वेस्टर्न कमांड के आई.जी. राजेश कुमार, बी.एस.एफ. पंजाब फ्रंटियर के आई.जी. डॉ. अतुल फुलझले और डीजीपी चंडीगढ़ डॉ. सागरप्रीत हुड्डा उपस्थित थे, जबकि डीजीपी उत्तराखंड दीपम सेठ और डीजीपी लद्दाख आनंद कुमार जैन वर्चुअल माध्यम से बैठक में शामिल हुए।
केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी.आर.पी.एफ.), राष्ट्रीय अन्वेषण एजेंसी (एन.आई.ए.) और सब्सिडरी खुफिया ब्यूरो (एस.आई.बी.) के वरिष्ठ प्रतिनिधियों के अलावा, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, चंडीगढ़ के राज्य पुलिस बलों और अन्य केंद्रीय एवं सुरक्षा एजेंसियों ने भी विचार-विमर्श में भाग लिया।अंतर-एजेंसी समन्वय को संस्थागत रूप देने की आवश्यकता पर जोर देते हुए, डीजीपी गौरव यादव ने कहा कि एन.आर.पी.सी.सी. पूरे क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक समस्या-समाधान, साझा कार्यान्वयन और ठोस मुकदेबाजी के लिए एक एकीकृत मंच के रूप में कार्य करना जारी रखेगी। उन्होंने कहा, “मूल रूप से, एन.आर.पी.सी.सी. का उद्देश्य समन्वय स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे अपराध और सुरक्षा को खतरे राज्यों की सीमाओं से परे फैल रहे हैं, उभरते खतरों से निपटने के लिए गुप्त सूचना साझा करना, निर्बाध अंतर-एजेंसी समन्वय और तेजी से संयुक्त कार्रवाई अत्यंत आवश्यक है।”
डीजीपी ने कहा कि संगठित अपराध, गैंगस्टर नेटवर्क, साइबर अपराध, ऑनलाइन कट्टरपंथी गतिविधियों और अन्य उभरती सुरक्षा चुनौतियों के खिलाफ हमारी साझा लड़ाई समन्वय-आधारित पुलिसिंग और अंतर-राज्यीय सहयोग की ताकत को दर्शाती है।बैठक के दौरान, विशेष डीजीपी यातायात ए.एस. राय ने पंजाब की प्रमुख सड़क सुरक्षा फोर्स (एसएसएफ) के बारे में एक प्रस्तुति दी, जिसमें सड़क मौतों में 52.87 प्रतिशत की कमी, 6 मिनट और 41 सेकंड की प्रतिक्रिया समय और 56,283 सड़क दुर्घटनाओं में 60,570 से अधिक नागरिकों को बचाने का विवरण साझा किया गया। उल्लेखनीय है कि डीजीपी लद्दाख ने व्यापक रूप से इस मॉडल की सराहना की और उन्होंने पंजाब के एसएसएफ मॉडल से सीखने में गहरी रुचि दिखाई।
आई.जी.पी. काउंटर इंटेलिजेंस आशीष चौधरी ने बताया कि पंजाब पुलिस ने विदेशों से अपराध और आतंकवाद को अंजाम देने वाले भगोड़े अपराधियों तक पहुँच बनाने के लिए ओवरसीज़ फ्यूजिटिव ट्रैकिंग एंड एक्सट्रडीशन सेल (ओएफटीईसी) का गठन किया है। वर्ष 2024 से कुल 17 भगोड़ों को भारत लाया गया है या प्रत्यर्पण के लिए कार्रवाई की गई है, जिनमें से नौ ओएफटीईसी के माध्यम से, जबकि शेष आठ अन्य भगोड़े पुलिस के आपसी समन्वय वाली कार्रवाइयों के माध्यम से विदेशों से भारत लाए गए हैं।सीमा सुरक्षा और ड्रोन-विरोधी उपायों पर जोर देते हुए, डीआईजी एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) अखिल चौधरी ने अपनी प्रस्तुति में मानव रहित हवाई प्रणालियों के माध्यम से हथियारों और नशीले पदार्थों की सीमा पार तस्करी को रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि पंजाब ने तीन एंटी-ड्रोन प्रणालियाँ कार्यान्वित की हैं और इसके साथ ही लगभग 600 कर्मचारियों की तैनाती वाले 64 समर्पित नाके भी लगाए गए हैं, जहाँ ड्रोन से संबंधित खतरों का पता लगाने और उनका जवाब देने के लिए 24 घंटे निगरानी की जा रही है।इस दौरान हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और लद्दाख के पुलिस बलों द्वारा पुलिसिंग के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों का लाभ उठाना, अंतर-राज्यीय आतंकवादी-गैंगस्टर-अपराधी गठजोड़ की निगरानी करना, अंतरराज्यीय समन्वय, नए आपराधिक कानून, साइबर अपराध का मुकाबला करना, सोशल मीडिया निगरानी आदि विषयों पर भी प्रस्तुतियाँ दी गईं।उल्लेखनीय है कि बैठक एडीजीपी काउंटर इंटेलिजेंस अमित प्रसाद द्वारा दिए गए औपचारिक धन्यवाद प्रस्ताव के साथ समाप्त हुई।



