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पंजाब के जल अधिकारों की रक्षा की जाए, सांसद साहनी ने बीबीएमबी नियमों की समीक्षा की मांग की

चण्डीगढ़ : राज्यसभा सांसद डॉ. विक्रमजीत सिंह साहनी ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) नियम, 1974 में हाल ही में किए गए संशोधन पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसके तहत शीर्ष पदों को पंजाब और हरियाणा के बाहर के उम्मीदवारों के लिए खोल दिया गया है। डॉ. साहनी ने कहा कि यह कदम दशकों से चली आ रही परंपराओं को समाप्त करता है और सहभागी राज्यों के सुनिश्चित प्रतिनिधित्व को कमजोर कर संघीय भावना को आघात पहुंचाता है, जिसे अब केवल एक औपचारिक प्राथमिकता तक सीमित कर दिया गया है। उन्होंने उल्लेख किया कि दशकों पुरानी और स्थापित परंपरा के अनुसार, सदस्य (पावर) का पद परंपरागत रूप से पंजाब के पास रहा है, जबकि सदस्य (सिंचाई) हरियाणा का प्रतिनिधित्व करता रहा है—जिससे बीबीएमबी के कार्य में संतुलन और न्यायसंगत व्यवस्था बनी रहती थी।

डॉ. साहनी ने याद दिलाया कि उन्होंने वर्ष 2022 में भी ऐसे ही एक संशोधन का कड़ा विरोध किया था, जिसमें पहली बार पूरे देश से नियुक्तियों की अनुमति दी गई थी और स्थापित परंपराओं को दरकिनार किया गया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि बीबीएमबी एक संवेदनशील अंतर-राज्यीय निकाय है, जो सतलुज, ब्यास और रावी नदियों के जल प्रबंधन से जुड़ा है, और इसमें तटीय (रिपेरियन) राज्यों की भूमिका को कमजोर करना सहकारी संघवाद को प्रभावित करता है तथा जल बंटवारे के मौजूदा संतुलन को बिगाड़ने का खतरा पैदा करता है। पंजाब की महत्वपूर्ण हिस्सेदारी और जिम्मेदारी को रेखांकित करते हुए, डॉ. साहनी ने कहा कि राज्य को उसके जल और विद्युत अधिकारों से जुड़े निर्णयों में नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उन्होंने केंद्र सरकार से इस अधिसूचना पर पुनर्विचार करने और बीबीएमबी के संचालन में पंजाब और हरियाणा के उचित प्रतिनिधित्व को सुनिश्चित करने वाली स्थापित परंपरा को बहाल करने का आग्रह किया।

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