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 डेरा बस्सी और लालडू में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के ज़रिए पंजाब में महिला सशक्तिकरण के केंद्र के तौर पर किया जाएगा विकसित: सतनाम सिंह संधू

 डेराबस्सी – राज्यसभा सतनाम सिंह संधू ने पंजाब की 60 सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (एसएचजी) की लगभग 500 महिलाओं महिलाओं से मिलकर बातचीत की, जिन्होंने दीनदयाल अंत्योदय योजना– राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) के तहत ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहलों से सफलता हासिल की है। यह केंद्र प्रायोजित योजना देश के गरीब ग्रामीण परिवारों की आजीविका सुधारने के लिए चलाई जा रही है।सांसद सतनाम सिंह संधू ने भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के प्रवक्ता एवं पंजाब एग्रो इंडस्ट्रीज के पूर्व वाइस-चेयरमैन मनप्रीत सिंह बनी संधू और बीजेपी डेरा बस्सी के मंडल प्रधान जगदीप सिंह औजाला के साथ डेरा बस्सी और लालडू में एसएचजी महिलाओं द्वारा लगाए गए प्रोडक्ट स्टॉल भी देखे और उनकी कड़ी मेहनत और लगन की तारीफ की।

स्टॉलों पर पंजाब की पारंपरिक और हस्तशिल्प कलाओं से जुड़े उत्पाद प्रदर्शित किए गए, जिनमें फुलकारी, सूट,  जुत्तियां, शहद, अचार, स्क्वैश, सिरका, तेल, मसाले, पापड़, साबुन, मोमबत्तियां आदि शामिल थे। इस मौके पर, एसएचजी की महिलाओं, जिनमें से कई ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ पहलों से लाभान्वित हुई हैं, ने अपने अनुभव और सफलता की कहानियाँ साझा कीं। कई महिलाओं ने बताया कि सेल्फ हेल्प ग्रुप्स और सरकारी योजनाओं ने उन्हें आत्मनिर्भर बनाया। आज वे न केवल अपने परिवार का सहारा हैं, बल्कि अन्य महिलाओं को भी रोजगार दे रही हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ पहलों ने उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। इन पहलों ने न केवल उन्हें आर्थिक स्थिरता प्रदान कर समाजिक प्रतिष्ठा दी है।

केंद्र सरकार की पहलों ने एसएचजी उत्पादों को सीधे बाजार तक पहुँचाकर आत्मनिर्भरता, आर्थिक उन्नति और महिला सशक्तिकरण की भी नई लहर पैदा की है। एसएचजी  के सदस्यों ने बताया कि पहले बिचौलिए उन्हें ठगते थे, लेकिन अब केंद्र सरकार ने एसएचजी को बिना किसी गारंटी के लोन उपलब्ध कराने की सुविधा दी है, जिससे उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने और अपनी आजीविका को स्थायी बनाने में मदद मिली है। महिलाओं ने कहा कि केंद्र सरकार की ‘लखपति दीदी’ और ‘ड्रोन दीदी’ जैसी पहलें कृषि, पशुपालन, डेयरी, मुर्गी पालन, मशरूम की खेती, खाद्य प्रसंस्करण और छोटे उद्योगों के ज़रिए महिलाओं के लिए स्वरोज़गार में अहम भूमिका निभा रही हैं।

लखपति दीदी‘ और ड्रोन दीदी‘ पहल महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण में निभा रही अहम भूमिका: सांसद सतनाम सिंह संधू

महिलाओं के सशक्तिकरण में केंद्र सरकार की लखपति दीदी, ड्रोन दीदी की पहल की तारीफ़ करते हुए,सांसद संधू ने कहा, “भारतीय महिलाओं ने आज़ादी की लड़ाई और आज़ादी के बाद भी अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में बड़ा योगदान दिया है। उनकी कोशिशों को पहचानते हुए, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले 12 सालों में महिलाओं को सम्मान और देश  विकास में योगदान का भागीदार हिस्सा बनाया है। लखपति दीदी और ड्रोन दीदी जैसी स्कीम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने और महिला सशक्तिकरण में क्रन्तिकारी परिवर्तन हैं। प्रधानमंत्री की 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ बनाने के लक्ष्य में से 2.9 करोड़ लखपति दीदियां बन चुकी है, जिनमें से 3,24,811 लखपति दीदियां पंजाब से हैं। इसी तरह, ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना चुनी हुई महिला सेल्फ हेल्प ग्रुप्स को ड्रोन देकर ग्रामीण महिलाओं को सशक्त बना रही है, ताकि वे खेती के लिए किराए पर ड्रोन सेवाएँ देकर आय के स्थायी अवसर पैदा कर सकें। राष्ट्रीय स्तर पर, 1,094 सेल्फ हेल्प ग्रुप्स (एसएचजी) को एलएफसी के ज़रिए ड्रोन उपलब्ध कराए गए हैं, साथ ही महिला एसएचजी सदस्यों को ड्रोन पायलट के तौर पर प्रशिक्षित भी किया गया है। पंजाब में 57 एसएचजी समूह हैं, और उतनी ही संख्या में महिला सदस्यों को ड्रोन पायलट के तौर पर प्रशिक्षित किया गया है। यह राज्य के टेक्नोलॉजी-आधारित आजीविका पहलों में योगदान को दर्शाती है।

डेराबस्सी की एसएचजी महिलाओं के अनुरोध परसांसद सतनाम सिंह संधू ने चंडीगढ़ में पब्लिक ट्रांसपोर्टेशन शुरू करने और शी मार्ट स्थापित करने का मामला यूटी प्रशासन के समक्ष उठाने का दिया आश्वासन – एसएचजी महिलाओं की चिंताओं को समझते हुए, सांसद सतनाम सिंह संधू ने कहा कि डेरा बस्सी और लालडू को सेल्फ-हेल्प ग्रुप्स के लिए एक हब के तौर पर डेवलप किया जाएगा। उन्होंने कहा, “डेरा बस्सी और लालडू , पंजाब में महिला सशक्तिकरण के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों के प्रमुख केंद्र बनेंगे।” सांसद ने मनप्रीत सिंह बनी संधू से डेरा बस्सी की महिलाओं के लिए एक स्किल ट्रेनिंग सेंटर बनाने के लिए सही ज़मीन ढूंढने को कहा। संधू ने डेरा बस्सी में इस स्किल ट्रेनिंग सेंटर के लिए अपने एमपी एलएडी और केंद्र सरकार से मिलने वाले फंड की घोषणा की। सांसद संधू, जो चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के चांसलर भी हैं, ने ट्रेनर्स प्रोग्राम की ट्रेनिंग के लिए भी मदद की घोषणा की और चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में इन ट्रेनर्स को ट्रेन करने के लिए हर संभव सहयोग देने की घोषणा की, ताकि ये ट्रेनर डेरा बस्सी और लालडू की और अधिक महिलाओं को और ट्रेनिंग दे सकें।

सांसद सतनाम सिंह संधू ने पंजाब के गवर्नर और चंडीगढ़ के एडमिनिस्ट्रेटर गुलाब चंद कटारिया से विचार करके चंडीगढ़ में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के प्रोडक्ट्स के लिए कम्युनिटी का रिटेल आउटलेट शीमार्ट (सेल्फ-हेल्प एंटरप्रेन्योर मार्ट) बनाने के लिए केंद्र सरकार से फंड देने की भी घोषणा की। महिलाओं और युवतियों को अपने उत्पाद बेचने के लिए चंडीगढ़ के बाजारों तक आसान पहुंच दिलाने के उद्देश्य से सांसद संधू ने पंजाब रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (पीआरटीसी) और चंडीगढ़ ट्रांसपोर्ट अंडरटेकिंग (सीटीयू) से बातचीत कर डेराबस्सी और लालरू में बसों का स्टॉपेज सुनिश्चित कराने की भी घोषणा की। उन्होंने चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी के कैंपस में सेल्फ हेल्प ग्रुप्स क्राफ्ट्स मेला लगाने की भी घोषणा की, जहां SHGs SARAS मेले की तरह अपने प्रोडक्ट्स बेच सकें।

लखपति दीदी‘ और एसएचजी ग्रुप्स की सफलताओं की प्रेरक कहानियां – एसएएस नगर, मोहाली की एक लखपति दीदी, चरणजीत कौर ने कहा,”मेरे समूह का नाम ‘शीतला आजीविका एसएचजी’ है।  हमारे ग्रुप की सालाना आय लगभग 15 लाख रुपये है। एसएचजी समूह के साथ हमें जोड़ने के लिए केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। मैं इस सेल्फ हेल्प ग्रुप्स के साथ छह से सात वर्षों से जुड़ी हुई हूँ। हमारे गांवों में सरकार द्वारा स्थापित इन समूहों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली महिलाएं रोजगार के अवसरों तक पहुँच प्राप्त कर रही हैं। मेरे गांव में, महिलाएं अपने घरों से ही फुलकारी तैयार करने, कढ़ाई और पारंपरिक पंजाबी जूती-जूते बनाने का काम कर रही हैं। मैं सरस मेलों के ज़रिए अपने प्रोडक्ट्स बेचने के लिए लगभग 15 राज्यों में जा चुकी हूँ और हमारा काम नए इलाकों में भी फैल रहा है। इससे होने वाली आय ने मुझे अपने बेटे को आगे की पढ़ाई के लिए कनाडा भेजने में मदद की है।”

‘सरबत दा भला’ सेल्फ-हेल्प ग्रुप की सदस्य मोनिया ने बताया कि उनका समूह महिलाओं की हाइजीन और हेल्थकेयर प्रोडक्ट्स प्रोडक्ट्स बनाते हैं। लालडू में हमारे ग्रुप में आठ सदस्य हैं। डेढ़ साल पहले शुरू हुए इस समूह को ‘लखपति दीदी’ योजना के तहत पहली फंडिंग मिली चुकी है। हमारे बनाए प्रोडक्ट्स से हर मेंबर को लगभग 10,000 मासिक आय हो रही है। उन्होंने कहा कि वे स्कूलों और कॉलेजों में मेंस्ट्रुअल हेल्थ के प्रति जागरूकता भी फैलाते हैं और इस पहल ने महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया है। लखपति दीदी पहल के लिए केंद्र सरकार की प्रशंसा करते हुए, डेरा बस्सी में नारी शक्ति सेल्फ़-हेल्प ग्रुप की सदस्य सरोज रानी ने कहा, “कि उनका 20 सदस्यीय समूह पिछले छह वर्षों से पंजाबी जूती (एक पारंपरिक जूती) का व्यवसाय कर रहा है।

केंद्र सरकार की मदद से वे 12 से अधिक सरस मेलों में अपने उत्पाद बेच चुके हैं। तीन बार बिना गारंटी सरकारी लोन मिलने से उनका व्यवसाय बढ़ा और आज समूह की सदस्य ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं। हमारे काम के लिए सरकार ने हमें सम्मानित भी किया है।” डेरा बस्सी में देशमेश आजीविका ग्रुप से जुड़ी डिम्पल, जो डेकोरेशन और टेलरिंग का कार्य करती हैं, ने बताया कि उन्होंने ‘ड्रोन दीदी’ योजना के लिए अप्लाई किया है और वर्तमान में ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग ले रही हैं। पिछले तीन वर्षों से समूह से जुड़ी डिम्पल ने कहा कि उन्हें दो बार लोन भी मिल चुका है। जिससे हमारा बिज़नेस दोगुना हो गया है और हमारे प्रोडक्ट्स की बिक्री भी दोगुनी हो गई है। यह सब हमारे लिए केंद्र सरकार की मदद के बिना मुमकिन नहीं था।”

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