Health News : लोगों में आजकल भूलने की आदत तेजी से बढती जा रही है। स्कूल और कॉलेज के छात्रों के साथ-साथ दफ्तर में काम करने वाले लोगों में यह शिकायत ज्यादा देखने को मिलती है। विशेषज्ञों की माने तो मानसिक सुस्ती और याददाश्त में कमी के पीछे तनाव, खराब जीवनशैली और पोषण की कमी मुख्य कारण होते हैं।हालांकि, अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ छोटे-छोटे बदलाव करके और सही आहार को शामिल करके आप अपनी दिमागी क्षमता और याददाश्त को कई गुना बेहतर बना सकते हैं। दिमाग को सेहतमंद रखने के लिए सबसे पहली शर्त है सही और संतुलित पोषण।
हमारे बुजुर्ग हमेशा से याददाश्त तेज करने के लिए बादाम और अखरोट खाने की सलाह देते आए हैं, जो पूरी तरह वैज्ञानिक भी है। सूखे मेवों में ओमेगा-3 फैटी एसिड और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं जो मस्तिष्क की कोशिकाओं को पोषण देते हैं। इसके अलावा अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां जैसे पालक, मेथी, ताजे मौसमी फल, दालें और दूध-दही को नियमित रूप से शामिल करें। ये खाद्य पदार्थ दिमाग को जरूरी ऑक्सीजन और ऊर्जा प्रदान करते हैं जिससे मानसिक थकान दूर होती है। पढ़ी हुई या सीखी हुई बातों को हमेशा के लिए याद रखने के लिए अपनी अध्ययन शैली में बदलाव करना बेहद कारगर साबित होता है। किसी भी विषय को पढ़ने के बाद किताब बंद करें और उसे मन में दोहराने या बिना देखे लिखने की कोशिश करें।
इसके बाद हफ्ते में कम से कम दो से तीन बार उस जानकारी का पुनरीक्षण (रिवीजन) जरूर करें। यह तरीका दिमाग के न्यूरॉन्स को मजबूत बनाता है और जानकारी को अल्पकालिक मेमोरी से निकालकर दीर्घकालिक (लॉन्ग टर्म) मेमोरी में सुरक्षित कर देता है। इसके अलावा पहेलियां सुलझाना और नई भाषाएं सीखना भी दिमाग को चुस्त रखता है। आहार और पढ़ाई के तरीकों के अलावा पर्याप्त नींद और शारीरिक व्यायाम भी याददाश्त बढ़ाने के लिए उतने ही महत्वपूर्ण हैं। तनाव मुक्त रहने और ध्यान लगाने से भी एकाग्रता में अभूतपूर्व सुधार होता है। एक वयस्क इंसान को रोजाना 7 से 9 घंटे की गहरी नींद जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि सोते समय ही हमारा दिमाग दिनभर की जानकारियों को व्यवस्थित करता है। रोज सुबह 20 से 30 मिनट टहलना, एरोबिक्स करना या योग करना मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है।



