नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बढ़ती अनिश्चितता के बावजूद, केंद्र सरकार ने देशवासियों को आश्वस्त किया है कि भारत में ईंधन की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने संभावित सप्लाई बाधाओं को लेकर चिंताओं को दूर करते हुए स्पष्ट किया कि सरकार मौजूदा अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर पैनी नजर बनाए हुए है। उन्होंने तिरुचिरापल्ली में मीडिया से बात करते हुए कहा कि घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित विभाग लगातार वैश्विक घटनाक्रमों की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईंधन की बिल्कुल भी कमी नहीं है और स्थिति की बहुत बारीकी से निगरानी की जा रही है।
इसी क्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने भी कमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर होटल और रेस्टोरेंट संचालकों से धैर्य बनाए रखने की अपील की है। उन्होंने स्वीकार किया कि युद्ध के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, क्योंकि भारत अपनी तेल आवश्यकता का लगभग 80-90प्रतिशत हिस्सा मध्य पूर्व के देशों से आयात करता है। उन्होंने बताया कि इस संकट के समाधान के लिए पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी से चर्चा की गई है और सरकार व्यवसायों पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय है।
साथ ही, युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के प्रयास भी तेज कर दिए गए हैं। बाजार को स्थिर करने के लिए केंद्र सरकार ने आवश्यक वस्तु अधिनियम लागू कर दिया है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने रिफाइनरियों को निर्देश दिया है कि वे एलपीजी उत्पादन को अधिकतम करें और प्रमुख हाइड्रोकार्बन को एलपीजी पूल की ओर मोड़ें। नई व्यवस्था के तहत घरेलू उपभोक्ताओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। घरों के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस और वाहनों के लिए सीएनजी की 100 प्रतिशत आपूर्ति सुनिश्चित की गई है।



