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चुनावी बयान मानहानि नहीं: वित्तमंत्री सीतारमण के खिलाफ दायर शिकायत कोर्ट ने की खारिज

नई दिल्ली । दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के खिलाफ दायर आपराधिक मानहानि की शिकायत को खारिज कर दिया है। यह शिकायत आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक सोमनाथ भारती की पत्नी लिपिका मित्रा द्वारा दाखिल की गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने न केवल शिकायत को आधारहीन बताया, बल्कि एक अत्यंत दुर्लभ अंग्रेजी शब्द फ्लॉक्सी-नॉसी-निहिली-पिलिफिकेशन का इस्तेमाल कर मामले की निरर्थकता पर कड़ा प्रहार किया।

अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पारस दलाल ने इस शब्द का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि इसका मतलब ऐसी वस्तु या विचार से है जो पूरी तरह मूल्यहीन या बेकार हो। अदालत के अनुसार, यह शिकायत भी वैसी ही थी, जिसमें एक अर्थहीन बात को अनावश्यक रूप से खींचा गया था। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि चुनावी माहौल के दौरान दिए गए राजनीतिक बयानों को हर परिस्थिति में अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। मामला मई 2024 में आयोजित एक प्रेसवार्ता से जुड़ा है। लिपिका मित्रा का आरोप था कि वित्त मंत्री ने उनके पति की प्रतिष्ठा को धूमिल करने और चुनावी संभावनाओं को नुकसान पहुंचाने के इरादे से झूठे और दुर्भावनापूर्ण बयान दिए।

हालांकि, अदालत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के ट्रांसक्रिप्ट का विश्लेषण करने के बाद पाया कि बयान का मुख्य स्वर राजनीतिक था। इसमें विपक्षी गठबंधन और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा गया था, न कि व्यक्तिगत रूप से शिकायतकर्ता की छवि पर हमला किया गया था। कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जब एक राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी दूसरे के खिलाफ कुछ तथ्य या स्थितियां पेश करता है, तो उसे मानहानि नहीं माना जा सकता। साथ ही, प्रेस कॉन्फ्रेंस का उद्देश्य केवल जनता को यह दिखाना था कि विपक्षी दल किन आरोपों से घिरे व्यक्तियों से जुड़े हैं। अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि इस मामले में प्रथम दृष्टया कोई अपराध नहीं बनता है, जिसके चलते संज्ञान लेने से इनकार करते हुए शिकायत को पूरी तरह रद्द कर दिया गया।

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