नई दिल्ली। दिल्ली के मुख्य चुनाव अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान किसी भी मतदाता का नाम केवल इसलिए वोटर लिस्ट से नहीं हटाया जाएगा क्योंकि उसका नाम वर्ष 2002 की मतदाता सूची में मौजूद नहीं था। अधिकारी ने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए केवल दो निर्धारित आधार हैं और सभी पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। यह स्पष्टीकरण आम आदमी पार्टी के नेता सोमनाथ भारती के उस बयान के बाद आया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि वर्ष 1997 में आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई और बाद में राजधानी में कानून की शिक्षा लेने के बावजूद उन्हें वर्ष 2002 की मतदाता सूची में अपना नाम नहीं मिला। उन्होंने यह आशंका भी जताई थी कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में नाम हटाए जा सकते हैं।
मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने बताया कि किसी मतदाता का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से केवल दो परिस्थितियों में हटाया जा सकता है। पहली, यदि 17 अगस्त तक निर्धारित एन्यूमरेशन फॉर्म जमा नहीं किया गया हो। दूसरी, यदि जांच के दौरान संबंधित व्यक्ति मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए अयोग्य पाया जाए। इसके अलावा किसी अन्य आधार पर नाम हटाने की प्रक्रिया नहीं अपनाई जाएगी।अधिकारियों के अनुसार, जिन मतदाताओं को वर्ष 2002 की सूची में अपना नाम नहीं मिल रहा है, वे एन्यूमरेशन फॉर्म भरते समय अपने माता-पिता या दादा-दादी एवं नाना-नानी से जुड़ी जानकारी दर्ज कर सकते हैं। यदि यह जानकारी भी पुराने रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं होती है तो वे बूथ लेवल ऑफिसर (बीएलओ) के पास उपलब्ध विवरण के आधार पर फॉर्म जमा कर सकते हैं। ऐसे मामलों में उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा।
घर-घर सत्यापन और एन्यूमरेशन फॉर्म के डिजिटाइजेशन के बाद तैयार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 24 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी। इसके बाद 24 अगस्त से 23 सितंबर के बीच उन मतदाताओं को नोटिस भेजे जाएंगे, जिनकी जानकारी वर्ष 2002 के रिकॉर्ड से सत्यापित नहीं हो पाएगी। ऐसे मतदाताओं को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ) के समक्ष आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे, ताकि उनका नाम अंतिम मतदाता सूची में बना रहे। अंतिम मतदाता सूची 27 अक्टूबर को जारी की जाएगी। मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय ने यह भी बताया कि वर्ष 2002 की विशेष पुनरीक्षण के दौरान तैयार मतदाता सूची वेबसाइट पर उपलब्ध करा दी गई है। वहीं, जो मतदाता वर्ष 2002 के बाद दूसरे राज्यों से दिल्ली आए हैं, उन्हें सत्यापन के दौरान अपने पूर्व राज्य की अंतिम विशेष पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित जानकारी देनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर वे अपने माता-पिता की मौजूदा मतदाता संबंधी जानकारी भी प्रस्तुत कर सकते हैं।



