नई दिल्ली। राज्यसभा में एक बार फिर सहमति की राजनीति देखने को मिली, जब हरिवंश नारायण सिंह को लगातार तीसरी बार उच्च सदन का उपसभापति निर्विरोध चुन लिया गया। यह अपने आप में ऐतिहासिक है, क्योंकि पहली बार किसी नेता को इस पद पर बिना किसी विरोध के लगातार तीसरी बार चुना गया है।इस महत्वपूर्ण अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं सदन में मौजूद रहे, जिससे इस चुनाव की अहमियत और बढ़ गई। आमतौर पर सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव देखने को मिलता है, लेकिन इस चुनाव में विपक्ष द्वारा उम्मीदवार नहीं उतारे जाने से सहमति का माहौल नजर आया।
निर्धारित समय सीमा तक विपक्ष की ओर से कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया, जिससे हरिवंश नारायण सिंह का निर्विरोध चुना जाना लगभग तय हो गया था। उनके समर्थन में कुल पांच प्रस्ताव दाखिल किए गए थे, जिन्हें विभिन्न दलों के नेताओं ने आगे बढ़ाया। इनमें भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा और केंद्रीय मंत्री निर्मला सीतारमण सहित कई वरिष्ठ नेताओं का समर्थन शामिल था।संसदीय परंपरा के अनुसार, इन प्रस्तावों को सदन में पेश कर वॉइस वोट के जरिए पारित किया गया, जिसके बाद बाकी प्रस्ताव स्वतः निरस्त हो गए। इस तरह यह प्रक्रिया औपचारिक रही, लेकिन इसका राजनीतिक महत्व काफी बड़ा माना जा रहा है।



