विश्व क्रिकेट में एक से बढ़कर एक स्पिनर हुए हैं उन्हीं में से एक हैं श्रीलंका के दिग्गज खिलाड़ी मुथैया मुरलीधरन। मुरलीधरन ने अपनी फिरकी से बल्लेबाजों को नचाया है। उनके नाम 800 टेस्ट विकेट का ऐतिहासिक रिकार्ड है जो आज तक कायम है। दुनिया को कोई भी स्पिनर उनका ये रिकार्ड तोड़ने की बात तो दूर उनके पास भी नहीं पहुंच पाया है। मुरलीधरन ने अपने अंतिम मैच में भी एक अनोख्रा रिकार्ड अपने नाम किया था। उन्होंने इस मैच में 8 विकेट लेकर अपने 800 विकेट पूरे किये थे। भारत के खिलाफ हुए इस मैच में मुरलीधरन भारतीय टीम के स्टार ऑलराउडर युवराज सिंह, हरभजन सिंह सहित कई खिलाड़ियों को आउट किया था।
इस मैच में जब भारत की अंतिम जोड़ी खेले रही थी तब मुरलीधरन को 800 विकेट पूरे करने के लिए एक विकेट की जरुरत थी और बल्लेबाज प्रज्ञान ओझा के आउट होते ही, मुरलीधरन ने अपने करियर का 800वां और अंतिम टेस्ट विकेट हासिल कर इतिहास रच दिया था।मुरलीधरन ने अपने करियर की शुरुआत 1992 को ऑस्ट्रेलिया के क्रेग मैकडरमोट के विकेट से हुई थी। इसके बाद उन्होंने अनवरत रूप से नए कीर्तिमान स्थापित किए। वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे तेज 350, 400, 450, 500, 600 और 700 विकेट पूरे करने वाले गेंदबाज बने। उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ सबसे अधिक 130 विकेट लिए , जबकि इंग्लैंड के खिलाफ 112, भारत के खिलाफ 105, दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 104 और जिम्बाब्वे के खिलाफ 100 विकेट हासिल किए।
133 टेस्ट मैचों में 22.72 के बेहतरीन औसत से 800 विकेट लेने वाले मुरलीधरन ने 67 बार एक पारी में पांच या उससे अधिक विकेट और 22 बार एक टेस्ट में दस विकेट लेने का कारनामा किया। उनके लंबे और सफल करियर में महेला जयवर्धने ने उनकी गेंदों पर 77 कैच लेकर टेस्ट इतिहास की सबसे सफल गेंदबाज-क्षेत्ररक्षक जोड़ियों में से एक का निर्माण किया। गॉल में प्रज्ञान ओझा का वह अंतिम कैच केवल एक विकेट नहीं था, बल्कि क्रिकेट इतिहास का ऐसा स्वर्णिम क्षण था जिसने मुथैया मुरलीधरन को टेस्ट क्रिकेट के सबसे महान स्पिन गेंदबाजों में शीर्ष पर पहुंचा दिया।



