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संसद में गतिरोध तोड़ने की कवायद: रिजिजू और राहुल की दूसरी बैठक, परिसीमन पर चर्चा

नई दिल्ली । संसद में जारी गतिरोध के बीच बुधवार को फिर सियासी सरगर्मी तेज हुई, जब संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की। महज 10 दिन के भीतर दोनों नेताओं की दूसरी अहम बैठक थी, जो करीब 50 मिनट तक चली। इस मुलाकात का मुख्य केंद्रबिंदु परिसीमन से संबंधित विधेयक रहा, इस केंद्र सरकार संसद में गतिरोध समाप्त करने की दिशा में एक पहल के तौर पर देख रही है। इस बैठक में राहुल गांधी के साथ प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद थीं।मुलाकात के बाद केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने बातचीत को सकारात्मक बताया और उम्मीद जाहिर की कि आगे की चर्चा से सदन में बना गतिरोध दूर हो सकता है। केंद्र सरकार की कोशिश है कि परिसीमन बिल पर व्यापक सहमति के साथ आगे बढ़ा जा सके।

सूत्रों के अनुसार, मोदी सरकार की पहल पर हुई बैठक में रिजिजू अपने एजेंडे के साथ पहुंचे थे, जिनमें परिसीमन बिल प्रमुख था। कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि इसी विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। राहुल गांधी ने अपना रुख स्पष्ट कहा कि कांग्रेस का स्टैंड पहले से साफ है; यदि सरकार किसी बदलाव या संशोधन के साथ प्रस्ताव लेकर आती है, तब उस पर बातचीत की जा सकती है।हालांकि, बातचीत के दौरान केवल परिसीमन का मुद्दा ही नहीं रहा। कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान पर चर्चा और छात्रों पर कथित लाठीचार्ज के मामले में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई। कांग्रेस का मानना है कि इन दोनों मुद्दों पर अभी सरकार के साथ सहमति नहीं बनी है। इसके अतिरिक्त, राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मुद्दा भी विपक्ष की मांगों में शामिल है, जिन पर फिलहाल गतिरोध बरकरार है।

बात दें कि केंद्र सरकार सिर्फ कांग्रेस से ही नहीं, बल्कि परिसीमन के मुद्दे पर अन्य विपक्षी दलों से भी बातचीत कर रही है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार की मंशा है कि इस महत्वपूर्ण विषय पर अधिकतम दलों को साथ लेकर आगे बढ़ा जाए, ताकि सदन में विधेयक को व्यापक समर्थन मिल सके। केंद्रीय मंत्री रिजिजू ने मुलाकात को अच्छी चर्चा करार दिया और संसद के गतिरोध को खत्म करने के लिए आशावादी होने की बात कही। 10 दिनों के भीतर इन दो मुलाकातों से यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई ठोस रास्ता निकलता है और क्या सरकार परिसीमन बिल को लेकर विपक्ष के साथ सहमति बनाने में सफल होती है, जिससे संसद की कार्यवाही सुचारु रूप से चल सके।

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