उभरते हुए बल्लेबज वैभव सूर्यवंशी की असली परीक्षा अब दिलीप ट्रॉफी मुकाबलों में लाल गेंद से खेलते समय होगी। सीमित ओवरों के प्रारूप में वैभव ने जमकर रन बनाये हैं पर लाल गेंद से रन बनना आसान नहीं होता। आगामी दलीप ट्रॉफी उनके लिए केवल एक टूर्नामेंट नहीं, बल्कि भविष्य की दिशा तय करने वाला मंच साबित होगा। चयनकर्ताओं ने उन पर बड़ा भरोसा जताते हुए उन्हें टीम का उपकप्तान नियुक्त किया है, जो उनके लिए अतिरिक्त दबाव के साथ ही प्रेरणास्पद भी होगा। जहां एक ओर वैभव अपनी आक्राममक बल्लेबाजी से सफेद गेंद क्रिकेट में छाये रहते हैं। वहीं वहीं फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उनकी राह उतनी आसान नहीं रही है।
पिछले आईपीएल सत्र में उन्होंने राजस्थान रॉयल्स की ओर से खेलते हुए 16 मैचों में 237.30 के विस्फोटक स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए थे और ऑरेंज कैप जीती थी। इसके अलावा, वह टीम इंडिया के लिए टी-20 अंतरराष्ट्रीय में भी खेल चुके हैं और लिस्ट-ए मैचों में 43.88 की औसत से 564 रन बनाए हैं। लेकिन रणजी ट्रॉफी के आंकड़े एक विपरीत रहे हैं। वैभव ने जनवरी 2024 में मुंबई के खिलाफ महज 12 साल की उम्र में अपना रणजी डेब्यू कर इतिहास रचा था। 8 फर्स्ट क्लास मैचों में उनका औसत केवल 17.25 रहा है, जिसमें वे 207 रन ही बना सके हैं। इस प्रारूप में उनका सबसे अधिक स्कोर 93 रन है और वे अभी तक एक भी शतक नहीं लगा पाए हैं।
लाल गेंद क्रिकेट पांच दिनों का खेल होता है, जबकि फेद गेंद के परिणाम तत्काल आते हैं। लाल गेंद प्रारुप धैर्य, तकनीक और मानसिक मजबूती की मांग करता है। दलीप ट्रॉफी में वैभव को देश के सबसे बेहतरीन और अनुभवी तेज गेंदबाजों का सामना करना होगा, जो सटीक लाइन-लेंथ और स्विंग-सीम से उनकी हर कमी को उजागर करने का प्रयास करेंगे। उन्हें अपनी आक्रामकता पर थोड़ा लगाम लगाकर पिच पर लंबा समय बिताने की कला सीखनी होगी। स्विंग होती गेंद के खिलाफ फुटवर्क को दुरुस्त करना, खराब गेंदों का इंतजार करना और सेशन दर सेशन बल्लेबाजी करने का अनुशासन दिखाना उनकी असली चुनौती होगी।
वैभव सूर्यवंशी के लिए यह दलीप ट्रॉफी सिर्फ एक अवसर नहीं, बल्कि उनके टेस्ट करियर का निर्णायक मोड़ हो सकता है। उपकप्तानी की जिम्मेदारी के साथ खुद को साबित करने का यह सुनहरा मौका उन्हें अपने अंदर छिपे सर्वश्रेष्ठ लाल गेंद के खिलाड़ी को बाहर लाने के लिए प्रेरित करेगा। यदि वे इस टूर्नामेंट में कुछ बड़ी और मैच जिताऊ पारियां खेलने में सफल रहते हैं, तो भारतीय टेस्ट टीम में जगह बनाने की उनकी दावेदारी बेहद मजबूत हो जाएगी।



