नई दिल्ली – नीट जैसी देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं की विश्वसनीयता को लेकर सुप्रीम कोर्ट अब सिर्फ कागजी दावों पर भरोसा नहीं करेगा। शुक्रवार को कोर्ट ने संकेत दिया कि उसके जज नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) के कार्यालय का दौरा कर परीक्षा व्यवस्था और सुरक्षा इंतजामों की प्रत्यक्ष पड़ताल करेंगे। अदालत यह देखना चाहती है कि परीक्षा में पेपर लीक और दूसरी गड़बडिय़ों को रोकने के लिए तैयार किया गया सिस्टम जमीन पर वास्तव में कितना प्रभावी है।खास बात यह है कि 19 अगस्त को केंद्र की ओर से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया था कि नीट परीक्षा का सिस्टम अब ‘फूलप्रूफ’ बनाया गया है और इसमें सेंध लगाना मुश्किल है। इसके बाद कोर्ट का एनटीए कार्यालय जाकर व्यवस्था देखने का फैसला इस दावे की व्यावहारिक जांच के तौर पर देखा जा रहा है।
सुधारों का हिसाब भी सार्वजनिक होगा – सुप्रीम कोर्ट ने एनटीए में सुधार के लिए गठित हाई-पावर्ड कमेटी की सिफारिशों को केवल रिपोर्ट तक सीमित रखने के बजाय जमीन पर लागू करने पर जोर दिया है। अदालत ने एनटीए को अपनी वेबसाइट पर किए गए सुधारों और अब तक हुई प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने केंद्र के संयुक्त सचिव से भी कमेटी की सिफारिशों पर अब तक हुई कार्रवाई और प्रगति की जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल करने को कहा है। केंद्र ने बताया कि नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता वाले हाई-पावर पैनल की पहली अंतरिम रिपोर्ट सितंबर के अंत तक आने की संभावना है।
चार बिंदुओं पर बदलेगा परीक्षा सिस्टम
स्थायी विशेषज्ञ स्टाफ: सुनवाई के दौरान एनटीए में पर्याप्त स्थायी कर्मचारियों और विशेषज्ञों की जरूरत पर जोर दिया गया। बेहतर प्रशिक्षण, तकनीकी ढांचे और विभिन्न संस्थाओं के बीच समन्वय को भी परीक्षा सुरक्षा के लिए जरूरी बताया गया।
डिजिटल परीक्षा की ओर बढ़ेगा सिस्टम: कोर्ट ने कहा कि लिखित परीक्षा से डिजिटल परीक्षा की ओर बदलाव अचानक नहीं किया जा सकता। इसे चरणबद्ध तरीके से लागू करना होगा, ताकि नई तकनीक के कारण नई तरह की समस्याएं पैदा न हों।
सुधारों की जानकारी वेबसाइट पर: एनटीए को अपने सुधारों और उनकी प्रगति का विवरण सार्वजनिक करना होगा। इससे उम्मीदवारों और आम लोगों को परीक्षा प्रणाली में किए जा रहे बदलावों की जानकारी मिल सकेगी।
सुझाव देने का रास्ता खुलेगा: वकील और राज्य परीक्षा सुधारों से जुड़े अपने सुझाव निर्धारित ई-मेल के जरिए भेज सकेंगे। इन सुझावों को सुधार प्रक्रिया में शामिल करने पर विचार किया जाएगा।
नीट विवाद के बाद बढ़ी निगरानी – नीट-यूजी परीक्षा में सामने आई गड़बडिय़ों के बाद परीक्षा व्यवस्था की सुरक्षा और पारदर्शिता पर सवाल उठे थे। परीक्षा 3 मई को देश के 551 शहरों और विदेश के 14 केंद्रों पर हुई थी। करीब 23 लाख अभ्यर्थी इसमें शामिल हुए थे। एनटीए के मुताबिक 7 मई की शाम परीक्षा में गड़बड़ी की जानकारी सामने आई। इसके बाद मामला केंद्रीय जांच एजेंसियों को सौंपा गया। 12 मई को परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया और 21 जून को री-टेस्ट हुआ। मामले की जांच सीबीआई कर रही है और अब तक 13 लोगों की गिरफ्तारी की बात सामने आई है। इसी पृष्ठभूमि में यूनाइटेड डॉक्टर्स फ्रंट, फेमा और अन्य पक्षों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर कर एनटीए को भंग करने तथा पेपर लीक रोकने के लिए मजबूत निगरानी व्यवस्था की मांग की है। अब अदालत का फोकस इस बात पर है कि परीक्षा सुरक्षा के लिए किए जा रहे सुधार कागज पर कितने मजबूत हैं और वास्तविक परीक्षा व्यवस्था में वे कितने प्रभावी साबित हो रहे हैं।



