नई दिल्ली। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने साफ किया कि भारत के खिलाफ आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले किसी भी देश से बातचीत की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है और बातचीत में विश्वास रखता है, लेकिन अपनी सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। यदि कोई देश भारत के खिलाफ आतंकवाद को हवा देता है, तब उस देश से संवाद असंभव है। केंद्रीय मंत्री का सीधा-सीधा इशारा पाकिस्तान की तरफ था।केंद्रीय मंत्री सिंह ने याद दिलाया कि शंघाई सहयोग संगठन की बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भी इसतरह देशों को कड़ा संदेश दिया था जो आतंकवाद को अपनी नीति का साधन बनाते हैं या आतंकियों को पनाह देते हैं। उन्होंने जोर दिया कि जब तक पड़ोसी देश आतंकवाद की राज्य नीति पर कायम रहेगा, भारत भी आतंकवाद के खिलाफ हर तरह की कार्रवाई के लिए पूरी तरह स्वतंत्र है।
रक्षा मंत्री ने देश की रक्षा क्षमताओं में आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने भारत को केवल आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य नहीं दिया, बल्कि अपने सामर्थ्य पर विश्वास करना सिखाया है। आज डीआरडीओ केवल अनुसंधान संस्थान नहीं, बल्कि उद्योगों, विश्वविद्यालयों और नए उद्यमों को जोड़ने वाला राष्ट्रीय नवाचार मंच बन चुका है। रक्षा मंत्रालय ने नए उद्यमों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमईएस) से 2400 करोड़ रुपए से अधिक की खरीदारी को मंजूरी दी है, साथ ही नई तकनीक के विकास के लिए 1500 करोड़ रुपए से अधिक की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय युवा एआई, मानव रहित विमान, रोबोटिकी, क्वांटम तकनीक और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में भविष्य के युद्धों के लिए तकनीक तैयार कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के रक्षा औद्योगिक गलियारों में लगभग 70,000 करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव आए हैं, जिसमें से 10,000 करोड़ रुपए का निवेश हो चुका है।
भारतीय रक्षा उत्पाद अब 100 से अधिक देशों तक पहुंच रहे हैं, जिनमें एशिया, अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और यूरोप शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत वैश्विक स्थिरता और सम्मानजनक संबंध चाहता है। हमारा उदय किसी को पीछे छोड़ने या मौजूदा व्यवस्था को तोड़ने के लिए नहीं, बल्कि सामूहिक और समावेशी विकास के लिए है, बिना किसी संघर्ष के सकारात्मक बदलाव। उन्होंने जोर दिया कि सुरक्षा केवल सीमा पर तैनात सैनिकों की नहीं, बल्कि हम सभी का सामूहिक दायित्व है। उन्होंने समाज में एकता और राष्ट्रहित को व्यक्तिगत हितों से ऊपर रखने का आह्वान किया। भारत ग्लोबल साउथ के हितों को भी सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहा है, आवश्यकता पड़ने पर उन्हें हर संभव सहायता प्रदान कर रहा है।



