नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए 31 दिसंबर 2029 तक भारत को पूरी तरह नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने सभी राज्यों और सुरक्षा एजेंसियों से व्यापक अभियान में एकजुट होकर काम करने का आव्हान किया।राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद देशवासियों और सुरक्षा बलों को संबोधित कर केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने स्पष्ट किया कि नशीले पदार्थों की समस्या देश के विकास को बाधित कर सकती है और अर्थव्यवस्था पर भारी बोझ डाल सकती है। उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने अगले साढ़े तीन वर्षों (2026 के शेष, 2027, 2028 और 2029) के भीतर नशे के खिलाफ एक एकीकृत अभियान चलाने का संकल्प लिया है।
इस मौके पर, भाजपा नेता ने देश की सेवा में अपने प्राण न्यौछावर करने वाले बहादुर पुलिसकर्मियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने में जवानों की वीरता, अनुशासन और संयम की सराहना की। केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि देश अभी भी कई चुनौतियों से मुक्त नहीं हुआ है, लेकिन पुलिस बल ने कई दशकों पुरानी समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने भारत को नक्सलवाद से मुक्त करने में पुलिसकर्मियों के प्रयासों की सराहना की और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (सीएपीएफएस) तथा राज्य पुलिस बलों द्वारा लोकतंत्र की रक्षा में निभाई गई अहम भूमिका पर प्रकाश डाला। केंद्रीय गृह मंत्री शाह ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों का उदाहरण दिया, जहां पहली बार चुनाव से जुड़ी हिंसा में किसी की जान नहीं गई। उन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में भी चुनाव हिंसा को समाप्त करने में पुलिस की भूमिका का उल्लेख किया।
केंद्रीय मंत्री शाह ने कश्मीर में आतंकवाद पर लगाम लगाने, पूर्वोत्तर में शांति स्थापित करने और नक्सलवाद की समस्या को पूरी तरह खत्म करने में मिली सफलताओं का जिक्र किया, जिन्हें दशकों से आंतरिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां माना जाता था। उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नेशनल पुलिस मेमोरियल के उद्घाटन की सराहना की, जो कि शहीद पुलिसकर्मियों को सम्मान देने और उनके बलिदानों से प्रेरणा लेने के लिए बनाया गया है। केंद्रीय मंत्री शाह ने कहा कि आजादी के करीब आठ दशकों में भारत ने वैश्विक मंच पर जो सम्मानजनक स्थान हासिल किया है, उसकी नींव में हमारे बहादुर जवानों का बलिदान है। उन्होंने कहा कि इन वीर पुरुषों और महिलाओं ने अपनी आंतरिक सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए सर्वोच्च बलिदान न दिया होता, तब देश आज इस मुकाम पर नहीं होता।



