पटना । बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत ने कांग्रेस को बुरी तरह झकझोर दिया। पार्टी अपने गढ़ों में धराशायी हो गई। मगध, शाहाबाद, मिथिला, सारण और अंग क्षेत्र में एक भी सीट नहीं जीत सकी। सीमांचल की 4 और चंपारण की 2 सीटों ने ही उसकी लाज बचाई। 2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस इस बार महज 6 पर सिमट गई। केवल दो विधायक अपनी सीट बचा पाए। अररिया से अबिदुर रहमान और मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह दोबारा विधानसभा पहुंचे। बाकी दिग्गज धराशायी हो गए। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, विधायक दल नेता शकील अहमद खान, पूर्व मंत्री अवधेश सिंह सहित कई नेता हार गए। कांग्रेस ने 61 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे। सीमांचल में फारबिसगंज, किशनगंज, मनिहारी, अररिया और चंपारण में वाल्मीकिनगर, चनपटिया सीटें जीतीं। करारी हार के बाद पार्टी नेतृत्व मंथन में जुटा है।
विश्लेषक हार के कारण बताते हुए कहते हैं कि महागठबंधन में रणनीतिक समन्वय का अभाव, वोट चोरी का मुद्दा फीका पड़ना और गठबंधन में दरार। 10 सीटों पर घटक दलों के उम्मीदवार कांग्रेस के खिलाफ थे, जहां प्रदर्शन निराशाजनक रहा। टिकट बंटवारे में नाराजगी, भितरघात और बाहरी नेताओं को प्राथमिकता ने पार्टी को नुकसान पहुंचाया। कई वरीय पदाधिकारी चुनाव से पहले निष्क्रिय हो गए। यह हार कांग्रेस के लिए सबक है। बिहार में उसकी संगठनात्मक कमजोरी उजागर हुई। एनडीए की सुनामी ने साबित किया कि जनाधार खिसक चुका है। पार्टी अब पुनर्गठन और रणनीति पर ध्यान देगी। 2020 में 19 सीटें जीतने वाली कांग्रेस पार्टी 2025 में 6 पर सिमट गई। पार्टी के सिर्फ दो विधायक ही अपनी सीट बचा पाए।
अररिया से अबिदुर रहमान और मनिहारी से मनोहर प्रसाद सिंह दोबारा जीतकर विधानसभा पहुंचे। कांग्रेस के अन्य सभी दिग्गज चुनाव हार गए। प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम, पार्टी विधायक दल के नेता शकील अहमद खान, पूर्व मंत्री अवधेश सिंह जैसे दिग्गजों को हार का सामना करना पड़ा। इस बार कांग्रेस ने 61 सीटों पर उम्मीदवार खड़े किए थे। राहुल गांधी की पार्टी ने सीमांचल में फारबिसगंज, किशनगंज, मनिहारी और अररिया सीट जीती। वहीं चंपारण में वाल्मीकिनगर और चनपटिया सीट कांग्रेस के खाते में गई। बिहार में करारी हार के बाद पार्टी के दिग्गज मंथन में जुट गए हैं।



