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मोदी केबिनेट ने लिए दो बड़े फैसले : अटल पेंशन एवं एमएसएमई को सस्ती पूंजी की उपलब्धता

नई दिल्ली । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक मजबूती से जुड़े दो अहम फैसले हुए। एक ओर असंगठित क्षेत्र के करोड़ों श्रमिकों को बुढ़ापे की सुरक्षा देने वाली अटल पेंशन योजना को वर्ष 2030-31 तक जारी रखने का निर्णय हुआ। वहीं दूसरी ओर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को सस्ती पूंजी उपलब्ध कराने के लिए स्मॉल इंडस्ट्रीज डेवलपमेंट बैंक ऑफ इंडिया (सिडबी) को 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी सहायता मंजूर की गई।

मोदी कैबिनेट ने बुधवार को अटल पेंशन योजना के प्रचार-प्रसार, क्षमता निर्माण और विकासात्मक गतिविधियों के लिए सरकारी सहयोग जारी रखने का निर्णय हुआ है। साथ ही योजना को वित्तीय रूप से टिकाऊ बनने गैप फंडिंग की व्यवस्था भी बनी रहेगी। वर्ष 2015 में शुरू हुई योजना 60 वर्ष की आयु के बाद 1000 से 5000 रुपये तक मासिक पेंशन की गारंटी देती है। जनवरी 2026 तक इससे 8 करोड़ 66 लाख से अधिक लोग जुड़ चुके हैं। मोदी सरकार का मानना है कि इस विस्तार से असंगठित क्षेत्र के और अधिक श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकेगा। यह फैसला उस सच्चाई को स्वीकार करता है कि भारत की अर्थव्यवस्था आज भी रिक्शा चालक, घरेलू कामगार, रेहड़ी-पटरी वाले, खेत मजदूर और छोटे कारीगर जैसे असंगठित श्रमिकों पर टिकी है।

योजना का विस्तार इन वर्गों को यह भरोसा देता है कि कामकाजी जीवन के बाद भी सम्मानजनक जीवन संभव है। वित्तीय साक्षरता और पेंशन संस्कृति को बढ़ावा देकर सरकार एक मजबूत सामाजिक सुरक्षा ढांचे की ओर कदम बढ़ा रही है। दूसरे बड़े फैसले के तहत सिडबी को तीन चरणों में 5000 करोड़ रुपये की इक्विटी पूंजी दी जाएगी। इसका उद्देश्य बैंक की पूंजीगत स्थिति को मजबूत करना और एमएसएमई क्षेत्र को अधिक ऋण उपलब्ध कराना है। इस निवेश से वर्ष 2028 तक लगभग 25.74 लाख नए एमएसएमई लाभार्थी जुड़ने और औसतन 1.12 करोड़ नए रोजगार सृजित होने की संभावना है।

मजबूत पूंजी आधार से सिडबी सस्ती दरों पर संसाधन जुटा सकेगा और छोटे उद्यमियों को प्रतिस्पर्धी लागत पर ऋण उपलब्ध होगा। इससे स्टार्टअप, कुटीर और पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा, स्थानीय उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण व अर्धशहरी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा होगा। कुल मिलाकर, ये दोनों फैसले वर्तमान की जरूरतों और भविष्य की सुरक्षा को संतुलित करते हैं—एक तरफ बुढ़ापे की गारंटी, दूसरी तरफ युवाओं और उद्यमियों के लिए नए अवसर। यही विकसित भारत की ठोस नींव है।

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