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एंटी-स्नेक वेनम से इस वर्ष हरियाणा में 473 लोगों की जान बची, पांच वर्षों में 1,526 पीड़ितों का हुआ उपचार

चंडीगढ़ – हरियाणा में सांप के काटने के मामलों में समय पर एंटी-स्नेक वेनम (एएसवी) दिए जाने से इस वर्ष अब तक लगभग 473 सर्पदंश पीड़ितों की जान बचाई जा चुकी है। झज्जर और अंबाला जिलों में सर्पदंश के सबसे अधिक मामले सामने आए हैं। यह जानकारी स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने दी।डॉ. सुमिता मिश्रा ने बताया कि सर्पदंश के उपचार के लिए जीवन रक्षक एंटी-स्नेक वेनम प्रदेश के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी), सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) और नागरिक अस्पतालों में नि:शुल्क उपलब्ध करवाया जा रहा है। दवा की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए इसके स्टॉक की निरंतर निगरानी की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में सांप के काटने के 1,526 पीड़ितों का उपचार किया गया है। अधिकारियों के अनुसार, लोगों के व्यवहार में भी सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है। अब सर्पदंश के अधिकतर पीड़ित सीधे अस्पताल पहुंच रहे हैं और झाड़-फूंक, तांत्रिक उपचार अथवा अन्य पारंपरिक उपायों पर निर्भरता कम हुई है। ऐसे उपायों के कारण उपचार में होने वाली देरी कई बार पीड़ित के लिए गंभीर साबित हो सकती है। विभाग ने पलवल की 20 वर्षीय महिला का उदाहरण देते हुए बताया कि खेत में काम करते समय उसे सांप ने काट लिया था। परिजनों द्वारा उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने बिना देरी किए एंटी-स्नेक वेनम दिया। उपचार के बाद महिला पूरी तरह स्वस्थ हुई और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डॉ. सुमिता मिश्रा ने लोगों से अपील की कि सांप के काटने पर बिना समय गंवाए चिकित्सा सहायता प्राप्त करें। सांप के काटने के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। पीड़ित को शांत रखें, उसके अनावश्यक आवागमन को रोकें तथा जिस अंग पर सांप ने काटा है, उसे स्थिर रखते हुए हृदय के स्तर से नीचे रखें और यथाशीघ्र नजदीकी अस्पताल पहुंचाएं।उन्होंने कहा कि प्रभावित अंग में सूजन आने की संभावना को देखते हुए घड़ी, अंगूठी, चूड़ियां या कोई भी कसाव वाली वस्तु तुरंत हटा देनी चाहिए। सांप के काटने वाले स्थान को साफ पानी से हल्के हाथ से धोया जा सकता है।विभाग ने सलाह दी है कि यदि सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए संभव हो तो सांप की तस्वीर ली जा सकती है, ताकि चिकित्सकों को उसकी पहचान करने में सहायता मिल सके। हालांकि, सांप को पकड़ने या मारने का प्रयास बिल्कुल नहीं करना चाहिए। लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए प्रशिक्षित स्नेक रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देनी चाहिए।

स्वास्थ्य विभाग ने सांप काटने की स्थिति में कसकर रस्सी या टॉर्निकेट बांधने, घाव को चाकू अथवा ब्लेड से काटने, जहर चूसने, बर्फ, मिर्च, तेल या किसी पारंपरिक लेप का इस्तेमाल करने से सख्ती से बचने की सलाह दी है। पीड़ित को शराब या किसी अन्य नशीले पदार्थ का सेवन भी नहीं करवाना चाहिए। झाड़-फूंक या अन्य गैर-चिकित्सकीय उपचार में समय गंवाने के बजाय तत्काल अस्पताल पहुंचना चाहिए।सर्पदंश से बचाव के लिए लोगों को घरों और आसपास के क्षेत्रों में कूड़ा-कचरा, मलबा तथा ऐसी अन्य सामग्री जमा न होने देने की सलाह दी गई है, जहां चूहे और सांप छिप सकते हैं। खेतों में काम करने अथवा रात के समय बाहर निकलने वाले लोगों को जूते और लंबे कपड़े पहनने तथा टॉर्च साथ रखने की सलाह दी गई है।

विभाग ने लोगों से सीधे जमीन पर सोने से बचने, मच्छरदानी का उपयोग करने, जूतों और अन्य सामान को बिस्तर के नीचे न रखने, घर की दीवारों एवं दरवाजों में मौजूद दरारों और खुले स्थानों को बंद करने तथा अनाज का उचित ढंग से भंडारण करने की भी अपील की है, ताकि सांपों के घरों में प्रवेश की संभावना को कम किया जा सके। डॉ. सुमिता मिश्रा ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग एंटी-स्नेक वेनम की उपलब्धता की निरंतर निगरानी के साथ-साथ जन-जागरूकता और समय पर अस्पताल पहुंचकर उपचार कराने पर विशेष जोर दे रहा है। विभाग का उद्देश्य सांप के काटने से होने वाली मौतों को जीरो लाना है।

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