नई दिल्ली। गुरुवार को देश भर के लोगों ने पूरी श्रद्धा और उत्साह के साथ सावन के पवित्र महीने का स्वागत किया। सुबह से ही हजारों भक्त भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने और उनका आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए देश के कोने-कोने में स्थित शिव मंदिरों में उमड़ पड़े। सावन मास, जिसे श्रावण मास भी कहा जाता है, हिंदू पंचांग का पांचवां महीना है और इसे पूर्ण रूप से भगवान शिव की आराधना को समर्पित माना जाता है। मानसून के दौरान, जुलाई और अगस्त के महीनों में पड़ने वाला यह पवित्र समय हिंदू धर्म में सबसे शुभ अवधियों में से एक माना जाता है, जब लाखों भक्त व्रत रखकर, विशेष पूजा-अर्चना करके, मंदिरों में जाकर और तीर्थयात्रा करके इस महीने को मनाते हैं।
सावन की पहली सुबह से ही देशभर के शिव मंदिरों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों में लीन देखे गए। कई प्रमुख मंदिरों में भक्तों की लंबी कतारें लगी हुई थीं, जहां लोग पूरे उत्साह और गहरी आस्था के साथ धार्मिक समारोहों में शामिल हो रहे थे। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, सावन के महीने में ही ब्रह्मांड को बचाने के लिए समुद्र मंथन हुआ था। मंथन के दौरान जब विष निकला, जिससे पूरी सृष्टि के अस्तित्व पर खतरा मंडराने लगा, तो भगवान शिव ने उस विष को पी लिया। उन्होंने उसे अपने गले में ही रोक लिया, जिससे उनका गला नीला पड़ गया और तभी से उन्हें नीलकंठ नाम से भी जाना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान शिव को अपने पति के रूप में पाने के लिए सावन के महीने में ही कठोर तपस्या की थी। इसलिए, समृद्धि, वैवाहिक सुख और आध्यात्मिक कल्याण के लिए आशीर्वाद चाहने वाले भक्तों के लिए यह समय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। पूरे महीने भक्त भगवान शिव के प्रति अपनी अटूट श्रद्धा व्यक्त करने के लिए प्रत्येक सोमवार को विशेष व्रत रखते हैं। ये व्रत इस विश्वास के साथ रखे जाते हैं कि सावन के दौरान की गई सच्ची प्रार्थनाओं से शांति, समृद्धि और सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
इस महीने में वार्षिक कांवड़ यात्रा भी आयोजित की जाती है, जिसके दौरान कांवड़िये लंबी पैदल यात्रा कर गंगा नदी से पवित्र जल लेने जाते हैं और फिर उस जल को वापस लाकर भगवान शिव के मंदिरों में शिवलिंग पर अर्पित करते हैं। सावन के दौरान भक्त नियमित रूप से शिव मंदिरों में जाकर शिवलिंग का पारंपरिक अभिषेक भी करते हैं। इस अभिषेक के लिए दूध, शहद, दही, घी, जल और पवित्र बेलपत्र का इस्तेमाल किया जाता है, जिनका शिव पूजा में विशेष धार्मिक महत्व है। इसके अतिरिक्त, कई भक्त इस पवित्र महीने के दौरान शाकाहारी भोजन का ही सेवन करते हैं और मांसाहारी भोजन से दूर रहते हैं, जिससे इस महीने की पवित्रता और आध्यात्मिक महत्त्व और बढ़ जाता है।



