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सहमति-असहमति लोकतंत्र की ताकत, असहमति का भी होना चाहिए सम्मान : लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

संविधान पखवाड़ा के तहत आयोजित किया गया जनप्रतिनिधि सम्मेलन
कहा: 60 साल की यात्रा में अनेक चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद हरियाणा विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा प्रदेश

 चंडीगढ़-लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता हो सकती है तथा सहमति और असहमति भी होती है, लेकिन असहमति का भी सम्मान होना चाहिए। असहमति दिशा देती है, दर्शन देती है और काम करने की प्रेरणा देती है। उन्होंने कहा कि सहमति-असहमति के बावजूद देश और प्रदेश को आगे बढ़ाने के लिए सभी के साझे प्रयास होने चाहिए। उन्होंने कहा कि शासन चलाना एक जिम्मेदारी है, लेकिन उससे बड़ी जिम्मेदारी जनसेवा की है। ओम बिरला सोमवार को पंचकूला के इंद्रधनुष ऑडिटोरियम में हरियाणा विधानसभा संविधान पखवाड़ा के तहत आयोजित जनप्रतिनिधि सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर हरियाणा के मुख्यमंत्री  नायब सिंह सैनी, विधानसभा स्पीकर हरविंद्र कल्याण, नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधानसभा के उपाध्यक्ष डॉ कृष्ण मिड्ढा, संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा सहित मंत्रीगण, विधायक गण उपस्थित थे। लोकसभा अध्यक्ष ने दीप प्रज्जवलित कर जनप्रतिनिधि सम्मेलन का उद्घाटन किया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने संबोधन में कहा कि हरियाणा की धरती कर्म की धरती रही है। भगवान श्रीकृष्ण की धरती ने भगवद्गीता के माध्यम से कर्म का संदेश दिया है। इसी कर्म की धरती के किसान, मजदूर, नौजवान, उद्यमी और खिलाड़ी हर क्षेत्र में आगे रहे हैं। उन्होंने कहा कि 60 साल की यात्रा में अनेक चुनौतियों और कठिनाइयों के बावजूद हरियाणा विकास की अग्रिम पंक्ति में खड़ा प्रदेश है और यह सब संविधान के कारण संभव हुआ है। लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत का संविधान केवल हमारा ही नहीं, बल्कि दुनिया के सभी लोकतांत्रिक देशों के लिए मार्गदर्शक है। संविधान ने हमारी लोकतांत्रिक परंपराओं को आगे बढ़ाया। उन्होंने संविधान निर्माताओं, प्रारूप समिति के अध्यक्ष बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, संविधान सभा के सभी सदस्यों तथा हरियाणा-पंजाब क्षेत्र के उन महानुभावों को याद किया, जिन्होंने संविधान सभा में योगदान दिया।

उन्होंने कहा कि संविधान आज भी जीवंत रूप से हम सभी का मार्गदर्शन करता है। संविधान केवल शासन चलाने की व्यवस्था नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा है। इसमें भारत की राष्ट्रीय चेतना के साथ देश के करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का प्रतिबिंब है। संविधान हमारे हर दृष्टिकोण और हर विचार में मार्गदर्शन करता है। ओम बिरला ने कहा कि संविधान बनने के समय संविधान सभा में अपने-अपने मत और विचार रखे गए तथा असहमति और लंबी चर्चा के बाद संविधान बना। आजादी के बाद देश के सामने अनेक कठिनाइयां और चुनौतियां थीं। अलग-अलग राज्यों का विलय करना, राजनीतिक व्यवस्था देना और उसके साथ संसदीय लोकतंत्र को अपनाना बड़ी चुनौती थी। भाषा, संस्कृति, भौगोलिक परिस्थितियों और धर्म की विविधताओं के बावजूद भारत ने संसदीय लोकतंत्र को अपनाया और सभी को मत का अधिकार दिया।

उन्होंने कहा कि संसद के साथ विधानसभाओं की व्यवस्था और उसके बाद पंचायत राज तथा नगरीय क्षेत्रों में लोकतांत्रिक व्यवस्था विकसित हुई। पंचायत से लेकर दिल्ली तक लोकतंत्र की व्यवस्था भारत में है, जहां जनता की भागीदारी, जनता की सहभागिता और जनता का शासन है। उन्होंने कहा कि संविधान में सबको मौलिक अधिकार, समता, बंधुता, समान अधिकार, समान न्याय और व्यक्तिगत अधिकार दिए गए हैं। संविधान का एक-एक शब्द और एक-एक विचार हमारे जीवन का मार्गदर्शन करता है तथा कार्य पद्धति को दिशा देता है।लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि हरियाणा विधानसभा ने भी संविधान के मार्गदर्शन में 60 वर्षों के दौरान अपने सदस्यों के मत, विचार और दृष्टिकोण के साथ प्रदेश के विकास में योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि देश की सीमाओं की रक्षा और आंतरिक सुरक्षा में भी हरियाणा का जवान आगे रहता है। किसानों ने नई तकनीक को अपनाने में भी अग्रणी भूमिका निभाई है और हर क्षेत्र में हरियाणा ने गौरव बढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि हरियाणा विधानसभा के सदस्यों के विचारों और दृष्टिकोण में भिन्नता हो सकती है, लेकिन साझे प्रयासों से प्रदेश और देश को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता हमेशा रही है। उन्होंने कहा कि हरियाणा का देश की अर्थव्यवस्था तथा सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान में बड़ा योगदान है। राज्य विधानसभा ने समय-समय पर स्वस्थ परंपरा, उच्च कोटि की बहस, संवाद और तर्क के माध्यम से अपनी गरिमा बढ़ाई है। ओम बिरला ने कहा कि लोकतंत्र में सभी के दृष्टिकोण, विचार और मत आते हैं तथा साझे प्रयासों से ही प्रदेश और देश आगे बढ़ता है। इसलिए लोकतांत्रिक संस्थाओं में अच्छी परंपराओं को अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि विधायिका की जिम्मेदारी कानून और नीतियां बनाने तथा लोगों की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को पहुंचाने की है। कार्यपालिका का काम बनाए गए कानूनों को निष्पक्ष रूप से लागू करना है, जबकि न्यायपालिका का काम सभी को सरलता से न्याय दिलाना है।

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि संविधान की एक-एक धारा और अनुच्छेद दिशा प्रदान करते हैं। संसदीय लोकतंत्र में सहमति, असहमति तथा विचारों की भिन्नता हो सकती है, लेकिन साझे प्रयासों से देश और प्रदेश को आगे बढ़ाना विधानसभा के सदस्य के रूप में सभी की जिम्मेदारी है।उन्होंने सभी वर्तमान और पूर्व जनप्रतिनिधियों का उनके योगदान के लिए धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि चाहे कोई आज विधानसभा का सदस्य नहीं है, लेकिन वह आज भी सेवा का पुण्य कार्य कर रहा है। अंतिम व्यक्ति की जिंदगी में परिवर्तन लाना और उसके सामाजिक-आर्थिक जीवन में बदलाव लाना सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि सामाजिक और राजनीतिक जीवन में थकान या निराशा के बजाय समाज के अंतिम व्यक्ति के चेहरे पर खुशी लाने का प्रयास निरंतर जारी रहना चाहिए। उन्होंने सभी जनप्रतिनिधियों का अभिवादन करते हुए कहा कि उनके योगदान को हरियाणा की जनता हमेशा याद रखेगी।

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