नई दिल्ली । संसद के मानसून सत्र में गुरुवार को प्रधानमंत्री के फास्ट ट्रैक कोर्ट, के ट्वीट को लेकर एक बार फिर प्रदर्शनकारियों में रोष फैल गया है। नीट परीक्षा के खिलाफ प्रदर्शन को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रदर्शनकारियो पर मुकदमा नहीं चलने की शर्त रखी है। फास्ट्रेक कोर्ट की बात सामने आने के बाद प्रदर्शनकारी भड़क गए हैं इसका मतलब है सरकार मुकदमों में युवाओं को फसाना चाहती है। मांगों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष सांसद परिसर में आमने-सामने आ गए हैं।
विपक्ष ने नीट परीक्षा से जुड़े मामलों में सरकार को घेरते हुए शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ गए हैं। विपक्षी दलों का आरोप है, परीक्षा में हुई गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी सरकार को लेनी चाहिए।दूसरी ओर, सोनम वांगचुक के आंदोलन का मुद्दा भी संसद में गूंजा। वांगचुक ने स्पष्ट किया है। प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और भविष्य में शांतिपूर्ण आंदोलनों पर मुकदमे नहीं करने का भरोसा मिलने के बाद ही वे अपना अनशन समाप्त करेंगे। इस मांग पर विपक्ष ने सरकार से जवाब मांगा।संसद परिसर में सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने अलग-अलग प्रदर्शन किए। विपक्षी सांसद हाथों में तख्तियां लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते रहे। सत्तापक्ष के सांसदों ने भी विपक्ष पर संसद की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया।
लगातार हंगामे और नारेबाजी के कारण लोकसभा तथा राज्यसभा की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। सदन में व्यवस्था बहाल करने का प्रयास किया गया, गतिरोध समाप्त नहीं होने पर दोनों सदनों की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है, नीट परीक्षा, शिक्षा व्यवस्था और आंदोलनों से जुड़े मुद्दों पर सरकार और विपक्ष के बीच टकराव और तेज हो सकता है. जिससे संसद की कार्यवाही प्रभावित होने की संभावना बनी हुई है। जिस तरह से प्रदर्शनकारियों पर अभी भी दिल्ली पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया जा रहा है। उससे काकरोँच जनता पार्टी और विपक्ष उग्र है। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा से कम कुछ भी मानने को तैयार नहीं है। सोनम वांगचुक का आमरण अनशन 25वें दिन पहुंच चुका है। दिल्ली के जंतर मंतर में भीड़ बढ़ती चली जा रही है।



