नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारत और चीन की सेनाओं के बीच करीब चार वर्ष से अधिक समय तक चले सैन्य विवाद के पूरी तरह से खत्म होने के बाद अब दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंध तेजी से सामान्य होने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जिसमें बीते वक्त में हुई कई उच्च-स्तरीय बैठकों का बड़ा योगदान रहा है। इसी सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित की गई शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक से इतर भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जुन के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक हुई। जिसमें एलएसी पर शांति तथा सौहार्द को बनाए रखने और वर्तमान समय में पश्चिम-एशिया तथा खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष के संदर्भ में क्षेत्रीय और वैश्विक सुरक्षा के मामले पर भी विचार-विमर्श किया गया है।
यह जानकारी रक्षा मंत्रालय ने एक बयान जारी कर दी है। वहीं, रक्षा मंत्री ने एक्स पर की गई अपनी एक संक्षिप्त पोस्ट में चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल जुन के साथ हुई इस मुलाकात को लेकर प्रसन्नता जाहिर की है। मालूम हो कि बीते कुछ महीनों के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को फिर से पटरी पर लाने के लिए कई जरूरी कदम उठाए हैं। जो एलएसी विवाद की शुरुआत के तुरंत बाद यानी जून 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी इलाके में दोनों सेनाओं के बीच हुई खूनी हिंसक झड़प के बाद पूरी तरह से गर्त में चले गए थे। तनाव को कम करने के लिए दोनों देशों के बीच कई दौर की सैन्य कमांडरों की बैठक हुई और इसी के साथ-साथ कूटनीतिक मोर्चे पर भी निरंतर रूप से संवाद का क्रम चला।
जिसका परिणाम अक्टूबर 2024 में उस वक्त सामने आया। जब एलएसी विवाद से जुड़े हुए दो अंतिम इलाकों देपसांग और डेमचौक में विवाद समाप्ति को लेकर दोनों पक्ष राजी हुई। विवाद को खत्म करने के लिए दोनों देशों के बीच बनी आम सहमति के पीछे असल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच 2024 में रूस के कजान शहर में हुई द्विपक्षीय बैठक का सवार्धिक योगदान है। जिसमें तनाव खत्म करने के अलावा भविष्य में संबंधों में सुधार को लेकर उठाए जाने वाले कुछ कदमों को लेकर भी मंजूरी प्रदान की गई थी। पिछले साल अगस्त महीने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एससीओ शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन के तियानजिन शहर की यात्रा की। सम्मेलन के बाद दोनों राष्ट्राध्यक्षों के बीच एक बैठक हुई। जिसमें बातचीत का दायरा काफी विस्तृत था। पीएम मोदी ने चीन के साथ आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्धता जताई थी।



