HomeNationalलोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से लोकतंत्र में भागीदारी का किया आहवान

लोकसभा अध्यक्ष ने युवाओं से लोकतंत्र में भागीदारी का किया आहवान

नई दिल्ली: लोकसभा अध्यक्ष  ओम बिरला ने किरोड़ीमल कॉलेज के वार्षिकोत्सव समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा को केवल रोजगार प्राप्ति तक सीमित न रखते हुए उसे सामाजिक उत्तरदायित्व, समावेशिता तथा चरित्र निर्माण का सशक्त माध्यम बनाया जाना चाहिए। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे अपनी आकांक्षाओं को व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के साथ समन्वित करें तथा लोकतंत्र में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि वास्तविक प्रगति का मापदंड तभी सार्थक होता है, जब अवसर और विकास समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचें।

भारत के विकसित होते शिक्षा परिदृश्य का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 आलोचनात्मक चिंतन तथा शैक्षणिक लचीलेपन को प्रोत्साहित करते हुए एक परिवर्तनकारी युग का सूत्रपात कर रही है। उन्होंने कहा कि ज्ञान और कौशल निस्संदेह आवश्यक हैं, किन्तु इनके साथ सुदृढ़ नैतिक मूल्यों, सत्यनिष्ठा और धैर्य का समावेश भी उतना ही अनिवार्य है, जिससे स्थायी और सार्थक सफलता सुनिश्चित की जा सके। शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने उन्हें समाज का वास्तविक शिल्पकार बताया, जो न केवल ज्ञान का प्रसार करते हैं, बल्कि उत्तरदायी, जागरूक और राष्ट्रोन्मुख नागरिकों का निर्माण भी करते हैं।

बिरला ने महाविद्यालय की समावेशी पहलों की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक प्रौद्योगिकी एवं कौशल विकास के माध्यम से दृष्टिबाधित विद्यार्थियों को सशक्त बनाकर संस्थान समतामूलक शिक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास समावेशन के प्रति गहन प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि शिक्षा में सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों का समावेश अनिवार्य है, और यह प्रसन्नता का विषय है कि किरोड़ीमल कॉलेज अपनी समावेशी दृष्टि के माध्यम से इन आदर्शों को सक्रिय रूप से आत्मसात कर रहा है।

लोक सभा अध्यक्ष ने महाराजा अग्रसेन कॉलेज के छात्रों को संबोधित किया – इससे पहले दिल्ली विश्वविद्यालय के महाराजा अग्रसेन कॉलेज के वार्षिक उत्सव को संबोधित करते हुए, उन्होंने छात्रों से न केवल अपने चुने हुए क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त करने की सलाह दी, बल्कि देश की लोकतांत्रिक और विकास यात्रा की जिम्मेदारी संभालने का आग्रह भी किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य युवाओं के विजन, नवाचार और प्रतिबद्धता से ही प्राप्त होगा।

भारत के युवाओं को आत्मविश्वासी, महत्वाकांक्षी और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बताते हुए  बिरला ने कहा कि युवा भारतीय पहले से ही नवाचार, अनुसंधान, उद्यमिता और वैश्विक नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रहे हैं, जो विश्व पटल पर देश के बढ़ते प्रभुत्व को दर्शाता है। उन्होंने यह भी कहा कि यह अभूतपूर्व अवसरों का समय है, जहाँ युवाओं के पास भारत को अग्रणी वैश्विक शक्ति में बदलने की क्षमता है। कड़ी मेहनत, अनुशासन और दृढ़संकल्प को सफलता का आधार बताते हुए उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, उत्कृष्टता प्राप्त करने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के निर्माण में सक्रिय योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि शासन और नीति-निर्माण में युवाओं की अधिक भागीदारी से लोकतांत्रिक संस्थाएं मजबूत होंगी और उत्तरदायी एवं भविष्योन्मुखी नेतृत्व सुनिश्चित होगा।

महाराजा अग्रसेन कॉलेज की सराहना करते हुए बिरला ने इसे आधुनिक शिक्षा का एक जीवंत केंद्र बताया जो अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक उत्कृष्टता को बढ़ावा दे रहा है। महाराजा अग्रसेन के प्रेरणादायी शासन के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि समानता, सामाजिक समरसता और सामूहिक समृद्धि पर आधारित उनका कल्याणकारी शासन मॉडल आज भी प्रासंगिक है। सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और नेतृत्व का उल्लेख करते हुए उन्होंने सरदार पटेल को भारत के सुदृढ़ संवैधानिक और प्रशासनिक ढांचे का प्रेरणास्रोत बताया। इतिहास से सीखने के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि महान नेताओं के जीवन और दर्शन को समझने से युवाओं का चरित्र मजबूत होता है, उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और राष्ट्र निर्माण की भावना गहरी होती है।

लोक सभा अध्यक्ष ने डीपीएस, मथुरा रोड के छात्रों को संबोधित किया – इससे पहले, लोक सभा अध्यक्ष  ओम बिरला दिल्ली पब्लिक स्कूल, मथुरा रोड के वार्षिक उत्सव में भी शामिल हुए और राष्ट्र निर्माण में शिक्षा और चरित्र निर्माण के महत्व पर अपने विचार साझा किए। इस कार्यक्रम में छात्रों की कड़ी मेहनत, अनुशासन और प्रयासों को सराहा और सम्मानित किया गया।  बिरला ने बदलते समय में नवाचार, मौलिक सोच और तकनीक के महत्व पर बात की। उन्होंने आगे कहा कि ‘विकसित भारत 2047’ केवल एक नीतिगत दृष्टिकोण नहीं है, बल्कि स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक भारत को एक विकसित, समावेशी और आत्मनिर्भर राष्ट्र बनाने का सामूहिक राष्ट्रीय संकल्प है।

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