HomeUncategorizedमॉनसून ने बढ़ाई टेंशन: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं सूखे के आसार

मॉनसून ने बढ़ाई टेंशन: कहीं मूसलाधार बारिश तो कहीं सूखे के आसार

नई दिल्ली। अगस्त महीने में लगभग 15 दिन देश के बड़े हिस्से में झमाझम बारिश हुई। हालांकि अब मॉनसून कमजोर होने लगा है। चिंता की बात यह है कि जब मॉनसून पूरे चरम पर होना चाहिए, तभी यह कमजोर पड़ने लगा। मौसम विज्ञानियों ने पहले भी अल-नीनो की चेतावनी जारी की थी और कहा था कि इस बार बारिश कम होगी। इसका असर अब देखने को मिलेगा। अगले दो सप्ताह यानी 2 सितंबर तक बारिश की गतिविधियां बेहद कम रहेंगी। मौसम विभाग के मुताबिक पहले से भी 14 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं आने वाले समय में मॉनसून बेहद कमजोर हो जाएगा। इससे फसलें भी प्रभावित होंगी, खासकर खरीफ की फसलें जैसे धान, मक्का, दालें और सोयाबीन। वहीं उमस की वजह से सितंबर के महीने में लोगों को दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है, जिससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी बढ़ सकती हैं।

मॉनसून ट्रफ हिमालय के निचले इलाकों में स्थिर हो गई है। मॉनसून कमजोर होने की वजह से खरीफ की फसलों को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। मौसम विभाग की मानें तो हिमलायी बेल्ट और पूर्वोत्तर के राज्यों में अब भी भारी बारिश हो सकती है। उत्तरी बंगाल की खाड़ी के पास कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटे में बन सकता है। इस वजह से ओडिशा और छत्तीसगढ़ में भारी से भारी बारिश का अनुमान है। इन क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा जहां एक ओर बाढ़ का कारण बन सकती है, वहीं देश के अन्य हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति उत्पन्न होने की आशंका है, जिससे जल संकट और कृषि उत्पादन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।मौसम विज्ञानियों के मुताबिक असली समस्या मॉनसून ट्रफ ही है। मॉनसून ट्रफ के स्थिर होने का असर यह होगा कि मध्य भारत और बाकी हिस्से में बारिश की गतिविधियां कम हो जाएंगी। वहीं हिमालयी इलाके में ही मूसलाधार बारिश होगी। ऐसे में पहाड़ों में आपदा आएगी और बाकी का देश बारिश के लिए तरस जाएगा।

अगस्त और सितंबर के महीने में मैदानी इलाकों में सबसे ज्यादा बारिश की जरूरत होती है। हालांकि इसका उलटा होने की उम्मीद है, जिससे कृषि क्षेत्र को बड़ा नुकसान हो सकता है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी दबाव बढ़ेगा। मौसम विशेषज्ञों ने अपनी भविष्यवाणी में बताया कि सितंबर में सूखे की 70 फीसदी आशंका बन गई है। लॉन्ग पीरियड एवरेज बारिश में 85 फीसदी की कमी आ सकती है। जानकारों ने यह भी कहा है कि अल-नीनो के ताकतवर होने की वजह से हिंद महासागर डायपोल कमजोर हो रहा है। जानकारों का कहना है कि मॉनसून कमजोर होने की वजह से फसलें दांव पर लगी हैं। मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान और गुजरात में अगस्त महीने में सामान्य से 15 फीसदी कम बारिश होगी। ऐसे में दालों, सोयाबीन, मक्का की फसल भी प्रभावित होगी।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments