HomeHealth & Fitnessघुटनों और कूल्हों के जोड़ों को मजबूत बनाता है यह व्यायाम

घुटनों और कूल्हों के जोड़ों को मजबूत बनाता है यह व्यायाम

Health News :  ऑफिस में घंटों बैठकर काम करना, शारीरिक गतिविधियों की कमी और उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों का कमजोर होना, एक आम समस्या हो गई है। इन समस्याओं से छुटकारा पाने प्रभावी व्यायामों में से एक है घुटना संचालन। यह अभ्यास विशेष रूप से घुटनों और कूल्हों के जोड़ों को मजबूत बनाने, रक्त संचार को बेहतर बनाने और मांसपेशियों को अगले योगाभ्यास के लिए तैयार करने में सहायक होता है। यह शरीर को अंदर से गर्म करता है और जोड़ों को चिकनाहट प्रदान करता है, जिससे उनकी गतिशीलता बढ़ती है। आयुष मंत्रालय ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर घुटना संचालन योग करने की पूरी विधि विस्तार से बताई है, ताकि आम लोग भी इसका सही तरीके से अभ्यास कर सकें।

इस अभ्यास को करने के लिए सबसे पहले किसी शांत, स्वच्छ और हवादार स्थान पर एक चटाई बिछाकर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों के बीच लगभग एक फुट की आरामदायक दूरी रखें और अपनी रीढ़ को सीधा रखें। शरीर को ढीला छोड़ दें और मन को शांत करें। अब अभ्यास शुरू करें: श्वास लेते हुए, अपनी दोनों भुजाओं को धीरे-धीरे कंधों के स्तर तक ऊपर उठाएं। ध्यान रहे कि आपकी हथेलियां नीचे की ओर हों और भुजाएं कंधों की सीध में तथा जमीन के समानांतर रहें। इस स्थिति में शरीर को स्थिर रखें। फिर, श्वास छोड़ते हुए, अपने घुटनों को धीरे-धीरे मोड़ें और अपने शरीर को आधे बैठे हुए की स्थिति में लाएं। इस स्थिति में आपको ऐसा महसूस होना चाहिए जैसे आप किसी अदृश्य कुर्सी पर बैठने जा रहे हों।

अपनी पीठ को सीधा रखें, पेट को अंदर की ओर खींचे रखें और कंधों को ढीला छोड़ दें। अंतिम स्थिति में पहुंचकर कुछ सेकंड तक रुकें। इस अवस्था में, आपकी दोनों भुजाएं और दोनों घुटने जमीन के समानांतर रहने चाहिए। आपकी दृष्टि सामने की ओर होनी चाहिए और शरीर पूरी तरह से संतुलित रहना चाहिए। इस स्थिति में आप अपनी जांघों और कोर मांसपेशियों पर हल्का खिंचाव महसूस करेंगे। अब श्वास लेते हुए, धीरे-धीरे अपने शरीर को वापस सीधा करें और साथ ही अपनी भुजाओं को भी धीरे-धीरे नीचे ले आएं। इस पूरी प्रक्रिया को एक चक्र माना जाता है। शुरुआत में आप इसे दो बार दोहरा सकते हैं। धीरे-धीरे, अपनी शारीरिक क्षमता और सुविधा के अनुसार, आप इसे 3 से 5 बार तक बढ़ा सकते हैं।

अभ्यास पूरा होने के बाद, सामान्य स्थिति में वापस आकर कुछ देर विश्राम करें और अपने शरीर में आए बदलावों को महसूस करें। इस अभ्यास के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि अपनी श्वास को सहज और सामान्य रखें। श्वास को न तो रोकें और न ही झटके से कोई गति करें। यह अभ्यास अपनी क्षमता के अनुसार ही करें, कभी भी खुद पर अनावश्यक दबाव न डालें। यदि अभ्यास के दौरान घुटनों या कमर में तेज दर्द या किसी प्रकार की असहजता महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं। विशेष रूप से, गठिया (आर्थराइटिस) के गंभीर दर्द, घुटनों या कूल्हों में तीव्र सूजन, या हाल ही में हुई किसी सर्जरी की स्थिति में इस अभ्यास को बिल्कुल न करें।

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