HomeNationalसंसद के मानसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं, विशेष सत्र की...

संसद के मानसून सत्र का अब तक सत्रावसान नहीं, विशेष सत्र की अटकलें तेज

नई दिल्ली । संसद का मानसून सत्र समाप्त हुए दो महीने से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन अब तक उसका औपचारिक सत्रावसान नहीं हुआ है। 13 अगस्त 2026 को लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित की गई थी। इसके बावजूद सत्रावसान की अधिसूचना जारी नहीं होने से राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हैं। इस घटनाक्रम के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने की संभावनाओं पर भी अटकलें लग रही हैं।संसदीय प्रक्रिया में अनिश्चितकाल के लिए स्थगन और सत्रावसान दोनों अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं। अनिश्चितकालीन स्थगन का अर्थ है कि सदन की बैठकें समाप्त कर दी गई हैं और अगली बैठक की तारीख तय नहीं की गई है।

वहीं, सत्रावसान राष्ट्रपति की ओर से जारी आदेश के जरिए किसी सत्र का औपचारिक समापन होता है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के मुताबिक, संविधान में ऐसी कोई निश्चित समय-सीमा निर्धारित नहीं है, जिसके तहत सदन की कार्यवाही स्थगित होने के तुरंत बाद सत्रावसान करना अनिवार्य हो। इसलिए इस प्रक्रिया में देरी अपने आप में असंवैधानिक या गैरकानूनी नहीं है।भारतीय संसदीय इतिहास में सत्रावसान में देरी के उदाहरण पहले भी सामने आ चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार, 1987 में सत्र स्थगित होने के बाद सत्रावसान में 76 दिनों का अंतर रहा था। इसी तरह 1989 में 54 दिन, 2006 और 2013 में 49-49 दिन तथा 1963 में 41 दिनों की देरी दर्ज की गई थी।

वर्ष 2015 में मानसून सत्र के बाद 28 दिनों तक सत्रावसान नहीं हुआ था। उस समय वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) कानून पर राजनीतिक दलों के बीच सहमति बनाने की कोशिशें जारी थीं। मौजूदा स्थिति में सत्रावसान नहीं होने को लेकर विशेष सत्र की संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। संसदीय सत्रावसान की अधिसूचना लंबित रहने से सरकार के लिए उसी सत्र को आगे बढ़ाने या उसकी बैठक बुलाने का विकल्प बना रह सकता है। हालांकि, सरकार ने अभी तक किसी विशेष सत्र के आयोजन की आधिकारिक घोषणा नहीं की है। राजनीतिक चर्चाओं में महिला आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े संभावित संविधान संशोधन विधेयकों का भी उल्लेख किया जा रहा है। हालांकि, इन मुद्दों पर संसद में विधेयक लाने की तैयारी संबंधी अटकलों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में सत्रावसान में देरी के वास्तविक कारण और सरकार की आगे की संसदीय रणनीति को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -
Google search engine

Most Popular

Recent Comments