नई दिल्ली । कांग्रेस ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के खिलाफ अपने आंदोलन को राष्ट्रव्यापी स्तर पर विस्तारित करने की रणनीति तैयार की है। इस महत्वपूर्ण अभियान के कुशल समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन हेतु पार्टी ने अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के 208 वरिष्ठ नेताओं को पर्यवेक्षक बनाया है। ये पर्यवेक्षक देशभर के विभिन्न जिलों में विरोध प्रदर्शनों की निगरानी करने और लोकल इकाइयों के साथ मिलकर आंदोलन को गति देने वाले है।बात दें कि यह आंदोलन मुख्य रूप से उन गंभीर आरोपों पर केंद्रित है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के नाम पर करोड़ों पात्र नागरिकों के नाम हटाए गए हैं, जिससे उनके संवैधानिक मतदान के अधिकार गंभीर रूप से प्रभावित हो सकते हैं।
विपक्षी गठबंधन इंडिया के बैनर तले कांग्रेस केंद्र की एनडीए सरकार पर चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी का आरोप लगा रही है। पार्टी और उसके सहयोगी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त के तत्काल इस्तीफे तथा चुनाव व्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक सुधारों की मांग कर रहे हैं। हाल ही में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के नेतृत्व में दिल्ली में सशक्त विरोध प्रदर्शन आयोजित किया था, जिसमें कई वरिष्ठ नेताओं और मुख्यमंत्रियों ने भी भाग लिया था।हालांकि, त्यौहारी सीजन को ध्यान में रखते हुए, कांग्रेस ने फिलहाल दिल्ली में अपने विरोध प्रदर्शनों की गति को कुछ धीमा रखने का निर्णय लिया है, ताकि कार्यकर्ताओं पर लगातार दबाव न पड़े। इसके बावजूद, सभी राज्य इकाइयों को अपने-अपने लोकल स्तर पर विरोध गतिविधियों को जारी रखने के स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं।
पार्टी नेतृत्व का मानना है कि देशव्यापी आंदोलन को प्रभावी बनाए रखने के लिए बेहतर समन्वय और नियमित निगरानी अत्यंत आवश्यक है। नियुक्त किए गए 208 पर्यवेक्षकों को अगले एक-दो दिनों में अलग-अलग जिलों की जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी।नवंबर के अंतिम सप्ताह में राजधानी दिल्ली में फिर बड़े और संगठित कार्यक्रमों की योजना बनाई गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, 25 और 26 नवंबर को राज्य इकाइयां ‘चलो दिल्ली’ अभियान चलाएंगी। इसके बाद, 27 नवंबर को दिल्ली में कांग्रेस का एक विशाल कार्यक्रम आयोजित करने की संभावना है। इन सभी 208 पर्यवेक्षकों को आगामी दिल्ली कार्यक्रमों के लिए समर्थन और भागीदारी जुटाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी सौंपी जाएगी। कांग्रेस की नई रणनीति अब आंदोलन का केंद्र केवल दिल्ली तक सीमित न रखकर, इसे जिला स्तर पर संगठन और कार्यकर्ताओं की व्यापक भागीदारी के माध्यम से पूरे देश में फैलाना चाहती है। इसका मूल उद्देश्य लोकतंत्र की रक्षा करना, संविधान की गरिमा को अक्षुण्ण रखना और प्रत्येक नागरिक के अमूल्य मतदान के अधिकार को सुरक्षित करना है।



