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अब ट्रेनों में मिलने वाले खाने की क्‍वालिटी में एआई का होगा इस्तेमाल

नई दिल्ली। ट्रेनों में सफर करने वाले तमाम यात्री खाने की क्‍वालिटी की वजह से ही घर से खाना लेकर सफर करते हैं, लेकिन ऐसे यात्रियों को अब घर से खाना ले जाने की जरूरत नहीं। ट्रेनों में मिलने वाले खाने की क्‍वालिटी को लेकर भारतीय रेलवे खानपान और पर्यटन निगम ने बड़ा कदम उठाया है। क्‍वालिटी वाला खाना उपलब्ध कराने के लिए देशभर की 800 किचेन में एआई का इस्‍तेमाल किया गया है। इस तकनीक की मदद से आईआरसीटीसी किचन में साफ-सफाई और क्‍वालिटी पर नजर रख रही है। इसके लिए दिल्‍ली स्थिति मुख्‍यालय में वार रूम बनाया गया है, जो 24 घंटे काम करता है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक आईआरसीटीसी ने खाना तैयार करने वाली 800 के करीब किचन में एआई मोनिटरिंग तकनीक का इस्‍तेमाल किया है। इसके लिए 2,394 कैमरे लगाए गए हैं, जो किचन में होने वाली एक्‍टीविटीज पर 24 घंटे नजर रखते हैं। इस पहल का उद्देश्य यात्रियों को क्‍वालिटी और स्‍वादिष्‍ट खाना उपलब्ध कराना है। एआई आधारित यह सिस्टम खाने की क्‍वालिटी से जुड़े 9 प्रमुख चीजों की पहचान कर सकता है। इनमें कर्मचारियों द्वारा हेयरनेट पहनना, ग्‍लब्‍स का इस्तेमाल, सफाई व्यवस्था, फर्श की पोंछा, किचन में साफ सफाई तथा चूहे, मक्खी और कॉकरोच जैसे कीटों की मौजूदगी शामिल है।

खास बात यह है कि यह तकनीक छोटे से छोटे कीड़ों का भी पता लगा सकती है।आईआरसीटीसी के सीएमडी संजय जैन ने बताया जैसे ही सिस्टम किसी गड़बड़ी का पता लगाता है, संबंधित रसोई मैनेजर को तुरंत अलर्ट भेजा जाता है। यदि तय समय में समस्या का समाधान नहीं होता, तो मामला अधिकारियों तक पहुंचा दिया जाता है। आमतौर पर दो घंटे के अंदर ही समस्‍या का समधान हो जाता है। रेलवे के आंकड़ों के मुताबिक 2025-26 में आईआरसीटीसी ने यात्रियों को करीब 60 करोड़ भोजन परोसे गए।

इस दौरान खाने की क्‍वालिटी को लेकर तमाम शिकायतें सामने आयीं। पिछले पांच सालों में रेलवे को खाने संबंधी 19 हजार से ज्यादा शिकायतें मिलीं, जिनमें 3,137 मामलों में जुर्माना भी लगाया गया। आईआरसीटीसी के मुताबिक मौसम बदलने के दौरान खाने की क्‍वालिटी बनाए रखना सबसे बड़ा चैलेंज होता है। ऐसे समय में शिकायतें बढ़ जाती हैं। नई एआई तकनीक की मदद से यात्रियों सुरक्षित और हेल्दी खाना पहुंचाया जा सकेगा। इसके साथ ही शिकायतों में भी कमी आएगी।

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